उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के साथ सियासी तालमेल की कोशिशें तेज कर दी हैं। समाजवादी पार्टी से अलग होने और अपनी जनता पार्टी बनाने के बाद अब उनकी नजर कांग्रेस के साथ गठबंधन के जरिए अपनी और परिवार की राजनीतिक जमीन मजबूत करने पर है। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य और बेटी संघमित्रा मौर्य के लिए भी विधानसभा चुनाव में रास्ता बना पाएंगे?

 

कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत, सीटों की मांग और परिवार के सदस्यों के लिए संभावित विधानसभा क्षेत्रों की चर्चा ने यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। सीटों का बंटवारा और उम्मीदवारों को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ-साथ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन के समीकरणों को साधने की चुनौती भी है। स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस के साथ बातचीत का अहम पहलू सीटों का बंटवारा है।

 

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी जनता पार्टी के लिए 12 विधानसभा सीटों की मांग रखी है। वहीं, कांग्रेस की ओर से यह विकल्प दिए जाने की चर्चा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके समर्थक अपनी पार्टी के बजाय कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरें।एक अन्य रिपोर्ट में 10 सीटों पर सहमति बनने की बात कही गई है, लेकिन इसे लेकर औपचारिक घोषणा और अंतिम समझौते की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य की मांग कितनी पूरी होती है, यह कांग्रेस के साथ बातचीत और उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के सीट बंटवारे पर निर्भर करेगा।

यह भी पढ़ें: मोदी के बाद शाह-नवीन की जोड़ी मैदान में, पूर्वांचल में 2027 का चक्रव्यूह तैयार

बेटे उत्कृष्ट के लिए ऊंचाहार पर नजर

स्वामी प्रसाद मौर्य के सियासी समीकरण में उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य की भूमिका भी अहम है। रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से उत्कृष्ट पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। अब चर्चा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य उन्हें कांग्रेस के समर्थन से दोबारा चुनावी मैदान में उतारना चाहते हैं।ऊंचाहार सीट पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्थानीय दावेदारों की मौजूदगी इस रणनीति को जटिल बनाती है। अगर उत्कृष्ट मौर्य को यहां से चुनाव लड़ना है तो सीट के बंटवारे पर सहमति बनाना जरूरी होगा। कांग्रेस के लिए भी यह फैसला आसान नहीं होगा, क्योंकि उसे अपने स्थानीय नेताओं के दावों और गठबंधन के समीकरणों के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा।

 

यह भी पढ़ें: UP विधानसभा चुनाव: 60 सीटों से मोलभाव शुरू करके गठबंधन की गांठ खोलेगी सपा

बेटी संघमित्रा के लिए बिल्सी की चर्चा

स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य भी परिवार के राजनीतिक समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वह बदायूं से बीजेपी की सांसद रह चुकी हैं। बीजेपी से दोबारा टिकट नहीं मिलने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। अब बदायूं जिले की बिल्सी विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़ाने की संभावना पर चर्चा है। इसके लिए कांग्रेस में उनकी औपचारिक एंट्री और टिकट को लेकर सहमति जैसे सवाल अहम होंगे। अभी इसे संभावित राजनीतिक रणनीति के तौर पर ही देखा जा रहा है, अंतिम उम्मीदवारी के तौर पर नहीं।

खुद के लिए पडरौना या फाजिलनगर?

स्वामी प्रसाद मौर्य के अपने चुनाव लड़ने को लेकर भी कुशीनगर जिले की पडरौना और फाजिलनगर विधानसभा सीटों के नाम चर्चा में हैं। पडरौना से वह पहले विधायक रह चुके हैं, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़ा था और हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में उनके सामने अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को फिर मजबूत करने की चुनौती है। 

 

मौर्य-कुशवाहा और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ को राजनीतिक ताकत में बदलना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। चुनावी समीकरण केवल सामाजिक आधार से तय नहीं होते; स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और गठबंधन के फैसले भी महत्वपूर्ण होंगे।

सपा से दूरी के बाद नई राजनीतिक राह

स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वह बहुजन समाज पार्टी में रहे, फिर बीजेपी में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सपा से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी जनता पार्टी बनाई। अब कांग्रेस के साथ तालमेल की कोशिश उनके लिए नई राजनीतिक दिशा तलाशने का प्रयास है।

 

कांग्रेस के साथ आने से उन्हें विपक्षी गठबंधन में जगह और चुनाव लड़ने के लिए संभावित सीटें मिल सकती हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब दोनों पक्ष सीटों और उम्मीदवारों को लेकर सहमत हों। दूसरी ओर, कांग्रेस के सामने भी यह सवाल रहेगा कि अपने संगठन और स्थानीय नेताओं के हितों को सुरक्षित रखते हुए नए सहयोगियों को कितनी जगह दी जाए।

 

यह भी पढ़ें: जयंत चौधरी ने बढ़ाई BJP की टेंशन, ज्यादा सीटों पर जोर, कहां फंसा पेच?

परिवार की राजनीति और गठबंधन की परीक्षा

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के साथ बेटे उत्कृष्ट मौर्य और बेटी संघमित्रा मौर्य के लिए भी संभावनाएं तलाशनी हैं। इसके लिए केवल कांग्रेस से नजदीकी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर ठोस सहमति जरूरी होगी।


अगर कांग्रेस के साथ समझौता उनकी उम्मीदों के मुताबिक होता है तो मौर्य परिवार को चुनावी मैदान में उतरने के नए अवसर मिल सकते हैं। लेकिन ऊंचाहार, बिल्सी, पडरौना और फाजिलनगर जैसी सीटों पर स्थानीय दावेदारी और गठबंधन के हित उनके रास्ते की बड़ी कसौटी होंगे।

 

स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस से बढ़ती नजदीकी ने यूपी की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सीटों को लेकर बातचीत कहां तक पहुंचती है और क्या वह अपने परिवार के लिए भी वैसी राजनीतिक जगह बना पाते हैं, जिसकी उन्हें तलाश है।