उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कभी शिक्षक संगठनों का खासा दबदबा हुआ करता था। सदन में शिक्षकों के हितों की आवाज उठाने के लिए आधा दर्जन से अधिक खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि चुनाव जीतकर पहुंचते थे। लेकिन समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। हाल में हुए एमएलसी चुनाव के बाद विधान परिषद में शिक्षक संगठनों के सीधे प्रतिनिधित्व की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब शिक्षक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों में माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के संरक्षक राजबहादुर चंदेल ही एकमात्र सदस्य बचे हैं। कभी शिक्षक संगठनों की ताकत माने जाने वाले सदन में अब उनकी आवाज उठाने की जिम्मेदारी भी अकेले चंदेल के कंधों पर आ गई है।

प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक खंड शिक्षक निर्वाचन की सीटें हैं। एक समय ऐसा था, जब इन सीटों पर शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों का दबदबा रहता था। दो खंड स्नातक सीटों पर भी शिक्षक प्रतिनिधि चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचते थे। इनमें माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट की मजबूत पकड़ हुआ करती थी। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि सदन में शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते थे। अब इन सीटों पर राजनीतिक दलों का प्रभाव बढ़ने से शिक्षक संगठनों की भूमिका सीमित होती जा रही है।

तीन बार शर्मा गुट से जीते राजबहादुर चंदेल

राजबहादुर चंदेल का शिक्षक राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह 1992, 1998 और 2004 में माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से कानपुर-उन्नाव खंड शिक्षक सीट से एमएलसी निर्वाचित हुए थे। बाद में शर्मा गुट से उनका टिकट काट दिया गया तो उन्होंने निर्दल समूह बनाकर वर्ष 2010 में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2017 और 2023 में भी वह निर्वाचित हुए। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2029 तक है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) का नेतृत्व भी किया। वर्तमान में वह इस संगठन के संरक्षक हैं।

 

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ध्रुव त्रिपाठी और आकाश अग्रवाल भी शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे

राजबहादुर चंदेल बताते हैं कि वर्तमान सदन में उनके साथ सदस्य रहे ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दल समूह के डॉ. आकाश अग्रवाल भी शिक्षक संगठनों से जुड़े थे। दोनों इस बार भी सदस्य के रूप में सदन में लौटे हैं, लेकिन अब वे बीजेपी और सपा के बैनर से पहुंचे हैं। ऐसे में राजबहादुर चंदेल ही शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में सीधे सदन में मौजूद रहेंगे। बाकी सदस्य किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े होंगे।

 

राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी रहे राजीव यादव ने भी चुनाव के दौरान शिक्षक राजनीति में राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षक राजनीति में राजनीतिक दलों का कोई काम नहीं है। यह चुनाव सरकार बनाने या बिगाड़ने का नहीं, बल्कि शिक्षकों के प्रतिनिधि चुनने का है। चुनाव में बीजेपी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उन्हें 307 मतों से पराजित किया। ध्रुव को 14,887 और राजीव यादव को 14,580 वोट मिले।

 

स्नातक सीट पर भी तीसरे नंबर पर रहे शिक्षक नेता

खंड शिक्षक निर्वाचन के साथ ही प्रदेश की पांच खंड स्नातक सीटों पर भी चुनाव हुए थे। लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के नेता और अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु भी मैदान में उतरे थे। उन्हें 10,832 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। यह परिणाम भी शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के लिए राजनीतिक दलों के मुकाबले अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती को दिखाता है।

 

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शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि पहली बार ऐसी स्थिति बनी है, जब सदन में उनके संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं होगा। प्रदेश में आठ खंड स्नातक और आठ खंड शिक्षक की सीटें इसलिए बनाई गई थीं, ताकि शिक्षक और कर्मचारी अपने हितों की बात सदन में उठा सकें। शिक्षक संगठनों के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में राजबहादुर चंदेल के बचने से अब सदन में शिक्षकों की आवाज उठाने के लिए उन्हें अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी।