पश्चिम बंगाल के भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक ऐसा बयान दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने रविवार को 1947 के कोलकाता सांप्रदायिक दंगों को याद करते हुए एकजुट होने की अपील की थी।1947 में सांप्रदायिक दंगों में गैर-बंगाली लोगों की भूमिका का जिक्र किया। समिक भट्टाचार्य ने बताया कि 1947 में गुप्ता और जायसवाल समुदायों ने दंगों के दौरान बंगालियों का साथ दिया और लोगों को बचाया। इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जहां कांग्रेस पार्टी ने समिक भट्टाचार्य के बयानों को राजनीति से प्रेरित बताया। साथ ही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इस बयान पर सवाल उठाए।
6 सितंबर को समिक भट्टाचार्य कोलकाता के बहूबाजार में खूंटी पूजा समारोह में गए थे। जहां उन्होंने 1947 के सांप्रदायिक दंगों का जिक्र किया। जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। अब सवाल उठता है कि समारोह के दौरान समिक भट्टाचार्य क्या बोले थे, जिसके बाद कांग्रेस और तृणमूल पार्टी ने उन पर सवाल उठाए।
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क्या बोले समिक भट्टाचार्य?
समारोह के दौरान समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'उत्तरी कोलकाता में खड़े होकर एक बात तो जरूर कहनी होगी। अगर गुप्ता और जायसवाल परिवार यहां न होते और अगर उन्होंने तलवारें बनाने के लिए जरूरी लोहा मुहैया कराने में अपनी सारी दौलत न लगा दी होती, तो उत्तरी कोलकाता के वे भद्र और कुलीन बंगाली लोग आज मौजूद न होते, जिन्हें हम देखते हैं।'
इसके साथ ही समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश से लगे बंगाल के इलाकों में दुर्गा पूजा ‘गंभीर संकट में रही’। उन्होंने मुर्शिदाबाद के मूर्ति कलाकार पिता और बेटे हरगोबिंद दास और चंदन दास की मौत के बारे में भी जिक्र किया, जिन्हें कथित तौर पर काली, सरस्वती और लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने की प्रतिभा के कारण मार डाला गया।
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तृणमूल पार्टी ने लगाए आरोप
समिक भट्टाचार्य के बयान सुनने के बाद तृणमूल पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समिक ने बंगालियों का अपमान किया। साथ ही कुणाल ने दावा किया कि बंगालियों की अपनी परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास और अलग पहचान है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि ऐसे बयानों से कोलकाता की विरासत को नुकसान पहुंचाएंगी।
