पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होंगे और इन चुनावों की तैयारी में तमाम राजनीतिक दल लगे हुए हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी में पूर्व गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों शामिल हो गए जिसके बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई। पूर्व गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों को खुद सीएम भगवंत मान ने फिरोजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी में शामिल करवाया। हैरानी की बात यह है कि कुछ साल पहले इन्हीं गुरप्रीत सिंह सेखों की रिहाई का पंजाब सरकार विरोध कर रही थी। 

 

गुरप्रीत सिंह सेखों कोई आम व्यक्ति नहीं हैं। उन पर कुल 47 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह 2016 के चर्चित नाभा जेलब्रेक केस का प्रमुख आरोपी भी है। अब ऐसे व्यक्ति की राज्य की सत्ताधारी पार्टी में जॉइनिंग पर सवाल उठने ही थे और उठे भी। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसे राजनीतिक दलों ने भी आम आदमी पार्टी पर हमला बोला। 

 

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कौन हैं गुरप्रीत सिंह सेखों?

गुरप्रीत सिंह सेखों पंजाब के फिरोजपुर जिले के मुदकी क्षेत्र से जुड़े एक पूर्व गैंगस्टर हैं, जिनका नाम 2016 के चर्चित नाभा हाई-सिक्योरिटी जेल ब्रेक मामले में मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण, जबरन वसूली और हथियारों समेत गंभीर अपराधों से जुड़े 47 से अधिक मामले दर्ज रहे हैं। उनका नाम गैंगस्टर सुखा काहलवां की हत्या और विक्की गौंडर जैसे गैंगस्टरों से भी जोड़ा गया। 

 

चर्चिच नाभा जेल ब्रेक के बाद उन्हें 2017 में गिरफ्तार किया गया था और 2023 में उनकी सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगने के बाद वे जमानत पर बाहर हैं। साल 2015 में पुलिस कस्टडी में हुए गैंगस्टर सुक्खा काहलवां हत्याकांड में भी उनका नाम शामिल था। हालांकि, बाद में सबूतों के अभाव में वह कोर्ट से बरी हो गया था। 

राजनीति में कैसे हुई एंट्री?

पिछले साल पंजाब में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में गुरप्रीत सिंह सेखों के परिवार की दो महिलाएं चुनावी मैदान में उतरती हैं। उन दोनों को शिरोमणि अकाली दल से समर्थन मिलाती है। उनकी पत्नी मंदीप कौर सेखों बाजिदपुर सीट से और करीबी र‍िश्तेदार कुलजीत कौर सेखों ने फिरोशाह सीट से चुनाव लड़ी और जीत भी दर्ज की। इसके बाद उनके परिवार का राजनीतिक कद बढ़ा और सेखों ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। फिरोजपुर जिले खासकर जीरा विधानसभा क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव बढ़ा।

AAP को क्या फायदा होगा?

आम आदमी पार्टी को सबसे पहले तो फिरोजपुर और जीरा विधानसभा क्षेत्र में गुरप्रीत सिंह सेखों के शामिल होने से फायदा होगा। उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ रहा था और आगामी चुनाव के लिए तैयारी कर रहे थे। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि पार्टी उन्हें टिकट देगी या नहीं लेकिन पार्टी को उनके शामिल होने से कार्यकर्ताओं की एक फौज जरूर मिल गई है। 

 

इसके अलावा गुरप्रीत सिंह सेखों से आम आदमी पार्टी को होने वाले फायदे के बारे में उनके पुराने इतिहास से मिलता है। 27 नवंबर 2016 को पटियाला जिले की नाभा ब्रेक के दौरान जेल के अंदर बंद छह हाई-प्रोफाइल कैदियों को छुड़ा लिया गया था। इन कैदियों में चार गैंगस्टर और दो आतंकवादी शामिल थे। आतंकवादी हरमिंदर सिंह मिंटू और कश्मीर सिंह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से जुड़े हुए थे। खालिस्तान का समर्थन करने वाले कट्टरपंथी समुदाय में इस घटना के बाद से गुरप्रीत सिंह सेखों के प्रति एक सहानुभूति जरूर है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका पार्टी में शामिल होना इस समुदाय को आकर्षित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

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पंथक वोट को पाने की कोशिश?

आम आदमी पार्टी ने पिछले कुछ समय में कई ऐसी कोशिशें की हैं जिससे पंथक (सिख धर्म को मानने और कट्टर विचारों वाले) वोटबैंक उनकी तरफ आकर्षित हो। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर 10 दिन की पैरोल दिलाने के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की थी। सरकार ने बेअदबी को लेकर कानून पेश किया लेकिन उससे SGPC और अकाल तख्त के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो गई। 

 

आम आदमी पार्टी की इन तमाम कोशिशों को शिरोमणि अकाली दल (बादल) और लगातार मजबूत होती सांसद अमृतपाल की पार्टी के वोटबैंक को अपने पाले में करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 2017 के चुनाव में शिरोमणि अकाली दल का वोटबैंक AAP की ओर शिफ्ट हुआ और अकाली दल तीसरे नंबर पर चला गया। 2022 में शिरोमणि अकाली दल सिर्फ 3 सीटों पर सिमट गया और AAP ने सरकार बना ली। अब शिरोमणि अकाली दल मजबूती के साथ वापसी करने की कोशिश कर रहा है और अमृतपाल की पार्टी भी पंथक वोटों को आकर्षित कर रही है। ऐसे में AAP को खतरा है कि 2017 और 2022 में उनका साथ देने वाले वोटर फिर से इन पंथक पार्टियों की ओर जा सकते हैं, जिसका सीधा नुकसान उन्हें आगामी चुनावों में होगा।