उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने प्रदेश की करीब 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा किया है लेकिन फिलहाल उसका पूरा जोर करीब 20 ऐसी सीटों पर है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या और पिछले चुनावों के परिणाम और पार्टी के संगठनात्मक आधार को देखते हुए जीत की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। AIMIM की नजर भले ही 200 सीटों पर हो लेकिन शुरुआती रणनीति में इन 20 सीटों को सबसे अहम माना जा रहा है। पार्टी इन क्षेत्रों में बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने के साथ मजबूत प्रत्याशियों की तलाश में जुटी है।
AIMIM की रणनीति में प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा समेत मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों को प्रमुखता दी जा रही है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में मजबूत संगठन और प्रभावी प्रत्याशी के जरिए चुनावी मुकाबले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जा सकती है।पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के मुताबिक, 2027 में AIMIM बड़े पैमाने पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है। हालांकि शुरुआती दौर में उन सीटों पर ताकत झोंकी जा रही है, जहां संगठन और मतदाता आधार मजबूत है।
2023 के निकाय चुनाव से बढ़ा उत्साह
AIMIM को 2023 के निकाय चुनाव में मिली सफलता से विधानसभा चुनाव के लिए उत्साह मिला है। पार्टी के प्रत्याशियों ने संभल, सिकंदराराऊ, घाटमपुर, कुंदरकी और डिबियापुर जैसे क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव में जीत दर्ज की थी। इसके बाद पार्टी ने इन क्षेत्रों में अपने संगठन को और मजबूत करने की रणनीति बनाई है।सिकंदराराऊ में पार्टी प्रत्याशी करीब 22 हजार मतों के अंतर से विजयी हुआ था जबकि घाटमपुर में भी पार्टी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इन परिणामों को AIMIM विधानसभा चुनाव के लिए अपने बढ़ते प्रभाव के संकेत के तौर पर देख रही है।
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200 सीटों का दावा, पहले 20 पर ताकत
पार्टी की रणनीति को दो स्तरों पर देखा जा रहा है। एक तरफ AIMIM पूरे प्रदेश में करीब 200 सीटों पर संगठन खड़ा करने और प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल करीब 20 सीटों को प्राथमिकता देकर वहां बूथ और विधानसभा स्तर तक संगठन मजबूत किया जा रहा है।पार्टी की कोशिश है कि जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां मजबूत प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाया जाए। इसके लिए आने वाले दिनों में असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता भी बढ़ने की उम्मीद है।
AIMIM के मैदान में उतरने से सबसे ज्यादा चर्चा मुस्लिम मतदाताओं के बीच संभावित वोट बंटवारे को लेकर है। पार्टी सिर्फ सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में है। ऐसे में 2027 के चुनाव में पश्चिमी यूपी से लेकर अवध और पूर्वांचल तक कई सीटों पर AIMIM विपक्षी दलों के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।हालांकि 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान और फिलहाल 20 सीटों पर विशेष फोकस विरोधाभासी नहीं, बल्कि चरणबद्ध चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पहले मजबूत सीटों पर संगठन और प्रत्याशी की क्षमता परखी जाएगी, इसके बाद अन्य सीटों पर विस्तार किया जा सकता है।
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ओवैसी की सक्रियता बढ़ने के संकेत
2027 के चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में सक्रियता बढ़ा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि वह प्रदेश में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है और चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर प्रभावी चुनौती पेश करेगी।ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही AIMIM आखिर शुरुआती दौर में सिर्फ 20 सीटों पर इतनी ताकत क्यों लगा रही है? दरअसल, इन सीटों को पार्टी अपनी चुनावी रणनीति का आधार मान रही है। यहां संगठन और प्रदर्शन मजबूत रहा तो विधानसभा चुनाव के दौरान बाकी सीटों पर भी दांव बढ़ाया जा सकता है।
