एक बार आम आदमी पार्टी (AAP) के हाथों अपना स्पेस गंवा चुकी कांग्रेस पार्टी इस बार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से बहुत बचकर चलती दिख रही है। छात्रों के मुद्दों पर मुखरता से आवाज उठाने के बजाय कांग्रेस पार्टी CJP के साथ नहीं खड़ी दिख रही है। जब तमाम विपक्षी नेता जंतर-मंतर जा रहे थे, उसी वक्त राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठकर इस बात को और पुष्ट कर दिया था। अब कांग्रेस की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों को कानूनी मदद दिलाने का ठीक वैसा ही वादा किया गया है जैसा कि CJP ने किया है। कांग्रेस के अलग-थलग रुख को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं के अलावा सोनम वांगचुक की पत्नी ने भी सवाल उठाए थे।
अब कांग्रेस की ओर से लगातार ऐसे प्रयास हो रहे हैं जो दिखाते हैं कि वह किसी भी सूरत में CJP को मुख्य विपक्ष नहीं बनने देना चाहती है। कांग्रेस ने इसके लिए अपने यूथ विंग और स्टूडेंट्स विंग यानी NSUI को भी ऐक्टिवेट कर दिया है। उसकी कोशिश यह है कि छात्रों के गुस्से को अपने साथ जोड़ा जाए ताकि साल 2012-13 की तरह यह गुस्सा फिर से किसी तीसरे के साथ न जाए और इसका फायदा कांग्रेस को ही मिले।
CJP जैसे ही प्रयास कर रही कांग्रेस
सोमवार को CJP की ओर से एलान किया गया कि एक वेबसाइट शुरू की जाएगी जिसके जरिए प्रदर्शनकारी छात्र कानूनी मदद ले सकेंगे। राज्यसभा सांसद और मशहूर वकील कपिल सिब्बल ने इसके लिए 1 करोड़ रुपये देने का भी एलान कर दिया है। CJP का कहना है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है तो वे इस वेबसाइट के जरिए वकीलों से कानूनी मदद ले सकते हैं। इस वेबसाइट से वकील भी जुड़ सकते हैं।
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उसी दिन कांग्रेस की यूथ विंग के नेताओं ने एक प्रेस वार्ता की। गुरमेहर कौर, रिचा सिंह और NSUI के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने एक प्रेस वार्ता में एलान किया कि कांग्रेस पार्टी उन छात्रों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू करेगी जिनके खिलाफ कोई केस इस वजह से दर्ज हुआ है कि वे प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं। साथ ही, पुलिस ऐक्शन का शिकार हुए लोगों की भी मदद करने का एलान किया गया है।
जंतर-मंतर नहीं गए राहुल गांधी
जंतर-मंतर पर जब प्रदर्शन हुए तो तमाम विपक्षों दलों के नेता वहां पहुंचे। कांग्रेस के भी कुछ नेताओं को भेजा गया लेकिन राहुल गांधी नहीं गए। समाजवादी पार्टी की ओर से डिंपल यादव, आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल , एनसीपी (शरद पवार) के मुखिया शरद पवार, शिवसेना (UBT) के मुखिया उद्धव ठाकरे समेत तमाम नेताओं के जाने के बाद जब जंतर-मंतर और CJP की चर्चा तेज हो गई तो अचानक राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए थे। कुछ ही घंटों में वह चर्चा में आ गए, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया लेकिन उन्होंने कहीं पर भी CJP का नाम नहीं लिया।
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पेपर लीक के मुद्दे को काफी पहले से उठा रहे राहुल गांधी की टीम अब यह दिखाने में लगी है कि CJP से पहले भी राहुल ऐसे मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के पुराने वीडियो भी शेयर किए गए हैं जिनमें वह शिक्षा के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। उन्होंने 'छात्रों की गूंज' नाम से एक कार्यक्रम भी शुरू किया है जिनमें वह कहते हैं कि उनका मंच राजनीतिक नहीं है। इन कार्यक्रमों में वह युवाओं का खूब जिक्र करते रहे हैं लेकिन CJP का कभी कोई जिक्र नहीं किया। जब 25 जलुाई को राहुल गांधी ने मीडियो को संबोधित किया तो उनके साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कई छात्र और छात्राएं भी थीं। राहुल गांधी ने तमाम मुद्दे उठाए लेकिन CJP का नाम नहीं लिया।
AAP जैसा दल नहीं बनने देना चाहती कांग्रेस?
कांग्रेस के इस तरह फूंक-फूंक कर कदम रखने की वजह आम आदमी पार्टी को माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली और पंजाब में AAP ने कांग्रेस की ही जगह ली है और इन दोनों जगहों पर कांग्रेस बेहद कमजोर स्थिति में चली गई है। 2013 में कांग्रेस से चूक हुई थी जब उसने समर्थन देकर अरविंद केजरीवाल की सरकार बनवा दी थी। इसी के बाद अरविंद केजरीवाल ने 2015 और 2020 में बंपर जीत हासिल की और लगातार तीन चुनाव में दिल्ली में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं जीत सका।
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इसी तरह AAP ने पंजाब में कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया और अब भी कांग्रेस वहां जूझ रही है। गुजरात और गोवा में भी AAP ने कांग्रेस के ही वोटबैंक में सेंध लगाई है। यही वजह है कि अब कांग्रेस किसी भी तीसरे धड़े को जगह नहीं देना चाहती है। कांग्रेस लगातार उन मुद्दों को उठा रही है जिनके जरिए CJP चर्चा में आई है। दरअसल, कांग्रेस को डर है कि अगर CJP ने आंदोलन के बाद राजनीति में उतरने का मन बना लिया और एक बड़ा वर्ग उसके साथ गया तो विपक्षी वोटों में ही बंटवारा होगा और इसका नुकसान कांग्रेस को ही होगा।
