उत्तर प्रदेश की राजनीति में जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे पिछड़ा वर्ग (OBC) की राजनीति चुनावी विमर्श के केंद्र में आती जा रही है। बीते कुछ महीनों में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद लगातार समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर हमलावर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे महज बयानबाजी नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
हाल के महीनों में केशव प्रसाद मौर्य ने कई सार्वजनिक मंचों और संगठनात्मक बैठकों में यह कहा कि BJP 2027 में भी सत्ता में लौटेगी और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद, जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं ओम प्रकाश राजभर ने पूर्वांचल के कई कार्यक्रमों में समाजवादी पार्टी पर पिछड़ों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। संजय निषाद भी निषाद, मछुआरा और अन्य अतिपिछड़ी जातियों के मुद्दों को उठाते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते रहे हैं।
आखिर OBC वोट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में OBC वर्ग को सबसे निर्णायक वोट बैंक माना जाता है। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक अध्ययनों के अनुसार प्रदेश में OBC आबादी करीब 40 से 45 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। यही कारण है कि कोई भी दल इस वर्ग की अनदेखी नहीं कर सकता। OBC वर्ग के भीतर भी कई बड़े सामाजिक समूह आते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से यादव, कुर्मी, मौर्य, शाक्य, सैनी, कुशवाहा, निषाद, बिंद, कश्यप, राजभर, लोध, गुर्जर, पाल, प्रजापति, तेली, कहार, नोनिया, गड़रिया समेत दर्जनों जातियां शामिल हैं। इनमें यादव वोटरों को परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी का मजबूत आधार माना जाता है, जबकि BJP पिछले एक दशक में गैर-यादव OBC वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रही है।
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PDA बनाम गैर-यादव OBC की लड़ाई
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद समाजवादी पार्टी ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को उठा रहे हैं। BJP को आशंका है कि यदि PDA का संदेश व्यापक स्तर पर प्रभावी हुआ तो गैर-यादव पिछड़े वर्गों में भी समाजवादी पार्टी की पैठ बढ़ सकती है।
यही वजह है कि BJP ने अपने OBC चेहरों को अधिक सक्रिय किया है। केशव प्रसाद मौर्य को संगठन और सरकार दोनों में प्रमुखता, राजभर को पूर्वांचल में सक्रिय भूमिका और निषाद समुदाय के बीच संजय निषाद की मौजूदगी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
BJP की रणनीति क्या है?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार BJP की रणनीति तीन स्तरों पर काम कर रही है, गैर-यादव OBC समुदायों को एकजुट रखना। समाजवादी पार्टी के PDA नॉरेटिव को चुनौती देना। छोटे और क्षेत्रीय पिछड़ी जातियों के नेतृत्व को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संदेश देना। BJP यह बताने की कोशिश कर रही है कि सत्ता, संगठन और सरकार में पिछड़े वर्गों को पर्याप्त भागीदारी दी जा रही है। इसके जरिए पार्टी 2027 से पहले अपने सामाजिक गठबंधन को और मजबूत करना चाहती है।
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2027 की असली लड़ाई OBC वोट पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का विधानसभा चुनाव काफी हद तक OBC वोटों की दिशा तय करेगा। यदि समाजवादी पार्टी PDA के जरिए गैर-यादव पिछड़ों में सेंध लगाने में सफल होती है तो मुकाबला कठिन हो सकता है, वहीं BJP की कोशिश है कि 2017 और 2022 की तरह गैर-यादव OBC वर्ग उसके साथ मजबूती से बना रहे। यही वजह है कि केशव प्रसाद मौर्य, ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद के बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी बिसात पर OBC वोटरों को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।


