पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और सियासी झटका लगा है।  नंदीग्राम में उनके उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के एक दिन बाद ही अब रेजीनगर में उन्हें झटका लगा है। उपचुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया है।

रबीउल चौधरी ने कहा है कि राज्य प्रशासन की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है, इसलिए वह यह फैसला ले रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय पार्टी के पास कोई आधिकारिक चुनाव चिह्न नहीं है। पार्टी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जा रहा है।

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क्यों रबीउल चौधरी ने वापस लिया अपना नाम?

रबीउल चौधरी का दावा है कि ज्यादातर कार्यकर्ता इलाका छोड़कर काम के सिलसिले में चले गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में वह किसके भरोसे चुनाव लड़ें। उन्होंने बताया कि प्रशासन के दबाव को देखते हुए कार्यकर्ताओं ने भी कहा है कि वह चुनावी मैदान में बने नहीं रह सकते, इसी वजह से उन्होंने अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया।

कब है वोटिंग?

नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है। अब ममता बनर्जी दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार गंवा चुकी हैं। शुक्रवार को नंदीग्राम से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस लिया था।

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कांग्रेस को समर्थन देने का दांव भी उलझा

अपनी उम्मीदवार के हटने के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को नंदीग्राम में कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शुक्रवार शाम ही 2007 के एक पुराने हत्या के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पार्टी का नाम और निशान भी छिन गया

ममता बनर्जी को इससे पहले गुरुवार को भी एक बड़ा झटका लगा था। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने का ऐलान किया। ममता बनर्जी गुट और न ही ऋतब्रत बनर्जी गुट इन उपचुनावों में पार्टी का नाम और चिह्न का इस्तेमाल कर पाएगा। 

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चिह्न नहीं तो कैसे लड़े जाएंगे चुनाव?

चुनाव आयोग ने अंतरिम तौर पर दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' वाला चिह्न मिला है। अरूप रॉय और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चिह्न मिला है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है।