इस साल सनातन धर्म के लोगों के लिए 14 सितंबर का दिन बेहद शुभ है। इसी दिन हिंदू धर्म से जुड़े तीन त्योहार मनाए जाएंगे। जहां एक तरफ कई जगहों, खासकर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाएगा।

 

इसके अलावा बिहार के मिथिलांचल में चौरचन नाम का महापर्व मनाया जाएगा। इन तीनों त्योहारों का अलग-अलग महत्व है। साथ ही तीनों त्योहारों में अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी वजह से व्यक्ति को तीनों त्योहारों का उत्सव मनाने से पहले उनके महत्व को समझना चाहिए।

 

गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घर में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं, जिसके 10 दिनों बाद गणेश विसर्जन की धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। जबकि हरतालिका तीज में महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। इसके अलावा मिथिलांचल के चौरचन पर्व में महिलाएं घर की सुख-शांति के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। आइए जानते हैं इन तीनों व्रतों की अलग-अलग परंपरा और महत्व क्या है।

 

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क्या है हरतालिका तीज का महत्व?

हरतालिका तीज एक ऐसा त्योहार है, जिसे विवाहित महिलाएं मनाती हैं, साथ ही कुंवारी कन्याएं भी यह पर्व मनाती हैं। इस पर्व में शादीशुदा महिलाएं व्रत रखती हैं, ताकि उनके पति की उम्र लंबी हो और वैवाहिक जीवन सुखद रहे। इसके अलावा कुंवारी लड़कियां इसलिए व्रत रखती हैं, ताकि उन्हें अच्छा वर मिले। इस पर्व में सभी महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-पाठ करती हैं।

 

इस साल हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन सभी महिलाएं सुबह उठकर स्नान करेंगी, जिसके बाद व्रत का संकल्प लेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को माता पार्वती को साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी चढ़ानी चाहिए। हरतालिका तीज की सबसे खास बात यह है कि भक्त सिर्फ सुबह के समय पूजा नहीं करते हैं, बल्कि रात के समय भी पूजा की जाती है।

 

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हरतालिका तीज में रात के समय की जाने वाली पूजा बेहद खास होती है। रात की पूजा करने से पहले महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद सभी महिलाएं व्रत कथा पढ़ती या सुनती हैं। जिसके बाद आरती की जाती है।

क्या है चौरचन त्योहार?

इस साल 14 सितंबर को चौरचन त्योहार मनाया जाएगा। चौरचन त्योहार बिहार के मिथिलांचल में बेहद प्रसिद्ध है। यह महापर्व छठ पर्व की तरह अहम माना जाता है। इस पर्व में सभी भक्त पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जिसके बाद रात के समय चंद्र देव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रात के समय चंद्र देव को अर्घ्य देना बेहद जरूरी है, वरना व्रत अधूरा माना जाता है।

 

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बिहार के मिथिलांचल में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी निर्जला व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चौरचन व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के कष्ट और दुख कम होते हैं। इसी वजह से मिथिलांचल का हर परिवार व्रत रखने की कोशिश करता है।

गणेश चतुर्थी की परंपरा

गणेश चतुर्थी एक ऐसा पर्व है, जब लाखों लोग अपने घरों में गणेश भगवान का स्वागत करते हैं। इस पर्व को महाराष्ट्र समेत देश-दुनिया में कई लोग बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता है, बल्कि 10 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान सभी लोग अपने घर में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं, जिसके बाद हर सुबह पूरा परिवार एक साथ मिलकर भगवान की पूजा करते है।