सनातन एक ऐसा धर्म है, जहां लोग देवी-देवताओं से लेकर प्रकृति, पेड़-पौधों की भी आराधना करते हैं। इसके साथ ही मृत्यु के देवता यमराज से लोग आमतौर पर डरते हैं, इसलिए उनकी आमतौर पर पूजा नहीं की जाती है। जबकि कुछ खास पर्वों पर यमराज की पूजा की जाती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, जब व्यक्ति यमराज की आराधना करके दीपदान करता है, तो यह दीपदान मृत्यु से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस साल नवंबर महीने में धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के पर्व मनाए जाएंगे। इन त्योहारों को मनाने से पहले लोगों को समझना चाहिए कि इन पर्वों पर यमराज की भी आराधना की जाती है।
सनातन धर्म में धनतेरस, छोटी दिवाली और भाई दूज के त्योहारों को बेहद खास माना जाता है। इस दौरान हर तरफ हंसी-खुशी का माहौल रहता है। इन त्योहारों पर यमराज के नाम पर दीपदान की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि यमराज को दीपदान करने से व्यक्ति के मन से अकाल मृत्यु का डर दूर होता है।
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इन पर्वों पर की जाती है यमराज की पूजा
धनतेरस
इस साल धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस त्योहार पर खास तौर पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। इस दिन सुबह लक्ष्मी माता, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, जिसके बाद शाम को 5:33 बजे से लेकर 8:09 बजे के बीच यमराज का स्मरण करके दीपदान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूजा के जरिए व्यक्ति अकाल मृत्यु को टालने की कामना करता है।
छोटी दीपावली
नवंबर महीने की 7 तारीख को छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसके साथ ही उन्होंने नरकासुर के चंगुल से 16 हजार कन्याओं को मुक्त कराया था।
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छोटी दिवाली कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाई जाती है। इस वजह से इस पर्व को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के बाद शाम के समय लोग यमराज के नाम पर चार मुख वाला दीपदान करते हैं, ताकि परिवार के हर व्यक्ति की उम्र लंबी हो।
भाई दूज
सनातन धर्म में भाई दूज के त्योहार को बेहद खास माना जाता है। इस दिन सभी भाई-बहन एक-दूसरे की जीवनभर रक्षा करने का प्रण लेते हैं। इसके साथ ही बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है और आरती करती है, जिसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।
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यह त्योहार सिर्फ भाई-बहन के स्नेह और रक्षा का प्रतीक नहीं है, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। इसी वजह से इस दिन यमराज के नाम पर दीपदान किया जाता है। इसके साथ ही भक्त अपने भाई या बहन की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
