हल छठ एक ऐसा त्योहार है, जो भादों महीने की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। उसी तरह इस साल भी सितंबर महीने में यह पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन लाखों महिलाएं अपने बेटों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, ताकि उनके बेटे की उम्र लंबी हो, साथ ही उनके जीवन की सभी बाधाएं खत्म हों। इसके अलावा, इस पर्व में वे महिलाएं भी व्रत रखती हैं, जिनके बच्चे नहीं होते हैं। माना जाता है कि व्रत के प्रभाव से महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है।

 

भारत में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे हरषष्ठी, हर छठ, बलराम जयंती और ललई छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व की तारीख को लेकर कई लोगों को दुविधा है। कई लोगों को लगता है कि हल छठ का पर्व 2 सितंबर को मनाना चाहिए, वहीं कुछ धार्मिक जानकारों का मानना है कि यह पर्व 3 सितंबर को मनाना चाहिए।

 

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हल छठ की सही तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार, भादो महीने की षष्ठी तिथि यानी 2 सितंबर को हल छठ पर्व शुरू होगा। यह पर्व 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगा। उसके बाद 3 सितंबर को सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगा। इस पर्व की सूर्योदय तिथि 2 सितंबर है, तो इसी दिन पर्व मनाना शुभ है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, हल छठ का पर्व उन सभी महिलाओं को रखना चाहिए, जिनकी संतान है, ताकि संतान के जीवन में सुख-संपत्ति और शांति आए।

 

हल छठ पर्व में खास तौर पर छठी माता की पूजा की जाती है। छठी माई की पूजा के लिए घर में गोबर से मूर्ति बनाई जाती है। सात अनाजों से भोग लगाया जाता है। सात अनाजों में गेहूं, जौ, धान, चना दाल, सेम की दाल, अरहर दाल और मूंग दाल अर्पित करना चाहिए।

 

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 हल छठ के शुभ मुहूर्त

हल छठ पर्व के दिन कई शुभ मुहूर्त हैं। इसमें सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 12:21 मिनट तक है। इसके अलावा, हर छठ पर्व पर व्यक्ति को राहुकाल में कोई शुभ काम करने से बचना चाहिए। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, राहुकाल दोपहर 12:21 बजे से लेकर 1:56 बजे तक रहेगा।

 

अमृत मुहूर्त- सुबह 7:35 से लेकर 9:10 तक होगा।
शुभ मुहूर्त-10:45 से लेकर दोपहर 12:21 तक रहेगा।
चर सामान्य मुहूर्त- 3:31 से लेकर शाम के 5:06 तक होगा।
लाभ-उन्नति मुहूर्त- 5:06 से 6:42 तक रहेगा।

इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हल से जुती हुई कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बलराम जी हल के प्रतीक हैं। इस वजह से हल छठ पर हल से जुती हुई चीजें नहीं खाई जाती हैं। जो लोग फलाहार व्रत रखने वाले हैं, वे मखाने और सिंघाड़े खा सकते हैं। इसके अलावा, लोगों को पर्व से एक दिन पहले से ही लहसुन-प्याज खाने से बचना चाहिए।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।