इस साल सावन महीने में पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। इस पर्व में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही, संतान को आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से इस दिन लोगों को भगवान विष्णु की पूजा-पाठ के साथ-साथ सच्चे मन से व्रत रखना चाहिए, ताकि व्रत के प्रभाव से भक्तों को संतान की प्राप्ति हो।
सनातन धर्म में एकादशी पर्व को बेहद खास माना जाता है। इस पर्व पर लाखों भक्त व्रत रखते हैं, जिसके प्रभाव से भक्तों को जीवन में सुख-शांति मिलती है। सभी एकादशी व्रतों में पुत्रदा एकादशी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्तों को संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान को लंबी आयु और सुख-शांति मिलती है। अब सवाल उठता है कि पुत्रदा एकादशी की सही तारीख क्या है? आइए जानते हैं।
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क्या है सही तारीख?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पुत्रदा एकादशी की सही तारीख 23 अगस्त है। तिथि पर नजर डालें तो पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त की रात 2 बजे से शुरू होगी, जो 24 अगस्त की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। धार्मिक जानकारों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी की उदय तिथि 23 अगस्त है। इस वजह से 23 अगस्त के दिन पर्व मनाना चाहिए।
जो लोग पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखेंगे, वे लोग 24 अगस्त को व्रत का पारण करेंगे। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा, जो सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसी दौरान भक्तों को पारण करना चाहिए।
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पुत्रदा एकादशी का महत्व
धार्मिक जानकारों के अनुसार, जिन लोगों की कोई संतान नहीं है, उन लोगों को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से लोगों को संतान की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों की संतान है, उन लोगों को भी व्रत रखना चाहिए, ताकि संतान की उम्र लंबी हो सके और साथ ही संतान के जीवन में खुशहाली आए।
कैसे करें पूजा-पाठ?
इस पर्व के दिन भक्तों को अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर पूजा करनी चाहिए। जो लोग व्रत रखने वाले हैं, उन लोगों को सुबह-सुबह स्नान करना चाहिए। उसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। पूजा-पाठ शुरू करने से पहले भक्तों को व्रत का संकल्प लेना चाहिए। तभी यह व्रत सफल माना जाता है। संकल्प के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इसके बाद पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करनी चाहिए।
