करवा चौथ का त्योहार जितना खास है, उतने ही खास तरीके से इस पर्व पर पूजा-पाठ किया जाता है। इस दिन सभी महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, ताकि करवा माता के आशीर्वाद से उनके पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन बना रहे। धार्मिक जानकारों के अनुसार, महिलाओं को व्रत रखने के साथ-साथ विधिवत तरीके से पूजा-पाठ करना चाहिए, वरना महिलाओं को करवा माता का आशीर्वाद नहीं मिलेगा और व्रत अधूरा रह जाएगा।
इस साल कार्तिक महीने की चतुर्थी तिथि यानी 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व पर करवा माता के साथ-साथ शिव जी, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। अब सवाल उठता है कि पूजा की विधि क्या है? आइए जानते हैं।
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करवा चौथ पूजा की सामग्री
करवा चौथ के त्योहार से पहले महिलाओं को कुछ सामान खरीद लेना चाहिए। पूजा की थाली, करवा की सींक, मिट्टी का दीया, कलश, घी, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, चावल के आटे का घोल, फल, मिठाई, छलनी और सिंदूर पूजा की सामग्री में शामिल हैं।4
करवा चौथ पूजा का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:58 बजे से सुबह 5:46 बजे तक रहेगा।
अमृत मुहूर्त: सुबह 8:17 बजे से सुबह 9:44 बजे तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:42 बजे से शाम 6:30 बजे तक रहेगा।
करवा चौथ की पूजा की विधि
1. पर्व के दिन सुबह उठ जाएं और स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। अपने घर के पूजा स्थान को साफ करें, फिर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
2. इसके बाद शाम के समय एक चौकी पर शिव जी, माता पार्वती और करवा माता की तस्वीर स्थापित करें। साथ ही करवा रखें। करवा यानी कलश में साफ जल भरें। इसके साथ ही उसमें चावल और चांदी का सिक्का या कोई दूसरा सिक्का डालना चाहिए। दूसरे करवे में चावल के आटे की पूड़ियां और मिठाई रखें।
3. इसके बाद सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर फूलों की माला पहनाएं। पूजा के दौरान देवी-देवताओं को फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। कई महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं।
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4. पूजा के बाद महिलाओं को एक साथ बैठकर व्रत की कथा ध्यान से सुननी चाहिए। व्रत कथा न सुनने पर व्रत अधूरा रह जाएगा।
5. शाम को चांद दिखने लगे, तो चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद छलनी में दीया रखकर चांद देखें, फिर अपने पति का चेहरा देखें। इसके बाद पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
