शारदीय नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में बेहद खास तरीके से मनाया जाता है। नवरात्रि खत्म होने के बाद विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन एक तरफ उत्तर भारत के कई राज्यों में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में विजयादशमी के दिन सिंदूर खेला की खास रस्म निभाई जाती है। इसमें विवाहित महिलाएं पहले मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने सिंदूर अर्पित करती हैं। उसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। हर साल की तरह इस साल भी यह परंपरा निभाई जाएगी। ऐसे में इस खास रस्म को निभाने से पहले जानिए इसका विशेष महत्व।
इस साल 21 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन कुछ राज्यों में सिंदूर खेला की परंपरा निभाई जाएगी। सिंदूर खेला की रस्म में पारंपरिक रूप से विवाहित महिलाएं शामिल होती हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रस्म में विधवा महिलाओं को शामिल नहीं होना चाहिए। हालांकि, मां दुर्गा की विदाई के समय हर व्यक्ति पंडाल में आ सकता है। अब सवाल उठता है कि इस रस्म का महत्व क्या है।
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सिंदूर खेला की रस्म निभाने वजह
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा और असम के कई लोगों की मान्यता है कि मां दुर्गा नवरात्रि के पहले दिन अपने मायके आती हैं और विजयादशमी पर अपने मायके से ससुराल लौट जाती हैं। ऐसे में भक्त विदाई के समय मां दुर्गा के समक्ष सिंदूर अर्पित करते हैं। यह सिंदूर मां दुर्गा के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
कैसे खेला जाता है सिंदूर खेला?
विजयादशमी के दिन महिलाएं लाल और सफेद रंग की साड़ी पहनती हैं। इसके बाद वे मां दुर्गा के पंडाल में जाती हैं, जहां सबसे पहले देवी मां को सिंदूर चढ़ाया जाता है। इसके बाद महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। सिंदूर लगाकर वे एक-दूसरे के सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
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सिंदूर खेला का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सिंदूर खेला एक पारंपरिक लोक-रस्म है, जिसे पश्चिम बंगाल में लंबे समय से निभाया जा रहा है। यह परंपरा धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय हुई। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस रस्म के जरिए केवल सुखी वैवाहिक जीवन की ही नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली और पति के स्वस्थ जीवन की भी कामना की जाती है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
