सनातन धर्म में अहोई अष्टमी का त्योहार बेहद खास माना जाता है। इस त्योहार में सभी महिलाएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती हैं। फिर शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। यह त्योहार दिवाली के ठीक 8 दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन अहोई माता के सभी भक्त विधिवत तरीके से पूजा करते हैं, ताकि माता के आशीर्वाद से महिलाओं की संतान को लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य मिले।

 

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल नवंबर महीने में अहोई अष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। हालांकि, कई लोगों को अहोई अष्टमी त्योहार की सही तारीख को लेकर कन्फ्यूजन है। कई जानकारों का मानना है कि यह त्योहार 1 नवंबर को मनाना चाहिए। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि यह त्योहार 2 नवंबर को मनाना चाहिए। तो ऐसे में आइए जानते हैं अहोई अष्टमी की सही तारीख क्या है।

 

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कब मनाई जाएगी अहोई अष्टमी?

हिंदू पंचांग के अनुसार 1 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से कार्तिक महीने की अष्टमी तिथि शुरू होगी। यह तिथि 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर खत्म होगी। इस पर्व में रात को तारों को अर्घ्य दिया जाता है। इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को मनाना चाहिए।

 

अहोई अष्टमी पर्व पर 1 नवंबर को शाम को अहोई माता की पूजा की जाएगी। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस दिन लगभग शाम 5 बजकर 58 मिनट पर तारे नजर आने लगेंगे। तभी महिलाएं अर्घ्य दे सकती हैं।

 

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कैसे करें पूजा?

इस दिन महिलाओं को सुबह-सुबह उठकर स्नान करना चाहिए। फिर स्नान करके घर के पूजा स्थान को साफ करें। अहोई माता की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें, जहां माता की प्रतिमा पर लाल चुनरी चढ़ाएं। अहोई माता के समक्ष निर्जल व्रत रखने का संकल्प लें।

 

अहोई माता के समक्ष जल से भरा कलश स्थापित करें। रोली, अक्षत, फूल, दीपक और प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के बाद अहोई माता से संतान की लंबी उम्र की कामना करें। पूजा के बाद आरती करें।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।