सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जाता है। यह पर्व न केवल नवदुर्गा की साधना का अवसर है, बल्कि लाखों लोग इस दौरान उत्सव भी मनाते हैं। इस त्योहार में भक्त व्रत रखते हैं, जिसके बाद नवरात्रि खत्म होने पर पारण करते हैं। इसके साथ ही, भक्त पर्व के आखिरी दिनों में कन्या पूजन की रस्म निभाते हैं। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस साल अष्टमी के दिन व्रत का पारण करना चाहिए, जबकि कई जानकारों का मानना है कि भक्तों को नवमी के दिन व्रत तोड़ना चाहिए।

 

इस साल शारदीय नवरात्रि में 18 अक्टूबर को अष्टमी है। इसके बाद 19 अक्टूबर को नवमी है। इस दौरान लाखों भक्त कन्या पूजन की परंपरा निभाते हैं और उसके बाद सात्विक भोजन करके व्रत खोलते हैं। आइए जानते हैं कि व्रत पारण की सही तारीख और शुभ समय क्या है।

 

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किस दिन करें पारण?

नवरात्रि के पारण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कई लोगों के घरों में अष्टमी के दिन व्रत का पारण किया जाता है, जबकि कई लोगों के घरों में नवमी के दिन पारण करने की परंपरा है। इस वजह से व्यक्ति अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अष्टमी या नवमी के दिन व्रत खोल सकता है।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से लेकर दोपहर 12:28 बजे तक है। यह समय बेहद शुभ माना जाता है। इसी दौरान व्यक्ति को पूजा और कन्या पूजन करना चाहिए। जिन लोगों को अष्टमी के दिन व्रत खोलना है, वे कन्या पूजन के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।

 

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इसके बाद 19 अक्टूबर को सुबह 11:42 बजे से लेकर दोपहर 12:28 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है। इस दौरान भी भक्त मां दुर्गा की विधिवत पूजा कर सकते हैं। इसके बाद कन्याओं को भोजन कराएं और सात्विक भोजन करके व्रत खोल लें।

कैसे करें कन्या पूजन?

कन्या पूजन से पहले भक्तों को मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद घर पर सात्विक भोजन बनाएं। 3 से लेकर 10 साल तक की कन्याओं का अपने घर में स्वागत करें। इसी उम्र के एक या दो लड़कों को भी आमंत्रित कर सकते हैं। घर आई कन्याओं के पैर साफ पानी से धोएं और फिर उन्हें आसन पर बिठाएं। इसके बाद कन्याओं को सात्विक भोजन कराएं। साथ ही, कन्याओं को कुछ गिफ्ट दें और उनका आशीर्वाद लेकर विदा करें।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।