जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में भारत ने हांगझोऊ के प्रदर्शन को नहीं दोहरा सका। इस बार 21 मेडल कम आए। हांगझोऊ में आयोजित पिछले एशियन गेम्स में भारतीय एथलीट्स ने 106 मेडल जीते थे, जिसमें 28 गोल्ड मेडल शामिल थे। हांगझोऊ में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद एक और बड़ी छलांग की उम्मीद थी लेकिन भारत का अभियान मेडल की संख्या में बड़ी गिरावट के साथ समाप्त हुआ।
आइची-नागोया से भारत 21 गोल्ड समेत कुल 85 मेडल के साथ लौटा। भारत ने मेडल टैली में फिर से चौथे स्थान पर फिनिश किया लेकिन अगर आखिरी दो दिनो में 11 गोल्ड नहीं मिले होते तो टॉप-5 में जगह बनाना भी मुश्किल होता।
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क्यों कम आए मेडल?
आइची-नागोया में भारत के कम मेडल आने का सबसे बड़ा कारण शूटिंग और एथलेटिक्स में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाना रहा। इन दोनों गेम्स में भारत मजबूत रहा है लेकिन हांगझोऊ की तुलना में इस बार कम मेडल मिले। खासतौर पर शूटिंग में भारत का प्रदर्शन गिरा। पिछली बार 7 गोल्ड, 9 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज सहित 22 मेडल जीतने वाली 30 सदस्यीय भारतीय टीम इस बार 3 गोल्ड, 8 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज सहित 15 मेडल लेकर लौटी। भारत के अभियान की शुरुआत कई मौकों के हाथ से निकलने और दावेदारों के लड़खड़ाने से हुई। डबल ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में भारत मेडल नहीं जीत सका।
पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में कमलजीत, आकाश भारद्वाज और केदारलिंग उचागांवने की टीम भी कुछ खास नहीं रही। सुरूचि सिंह और कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड जीतकर भारत का शूटिंग में सोने के तमगे का खाता खोला। हालांकि टीम का माहौल बदलने वाली खिलाड़ी नीरू ढांडा रहीं। 27 वर्षीय नीरू ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में सिल्वर और काइनान चेनाई के साथ मिक्स्ड टीम स्पर्धा में एक और गोल्ड मेडल जीता। मगर नीरू की शानदार उपलब्धियां भारतीय शूटिंग की चिंताओं को पूरी तरह नहीं छिपा सकी।
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एथलेटिक्स में भी लगा झटका
एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ा झटका लगा। हांगझोऊ में छह गोल्ड दिलाने वाले इस खेल में भारत प्रदर्शन इस बार काफी नीचे रहा। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही स्टार जैवलिन खिलाड़ी नीरज चोपड़ा चोट के कारण हट गए और भारत का एक बड़ा गोल्ड मेडल का दावेदार बाहर हो गया। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। तेजिंदरपाल सिंह तूर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी नहीं कर सके, जबकि लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर और हाई जम्पर सर्वेश कुशारे को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन दिखाता है कि भारत मुकाबले में तो है लेकिन मेडल के रंग को गोल्ड में बदलने में अभी अंतर बाकी है।
खिलाड़ियों की चोट ने भी भारत की परेशानी बढ़ाई। ज्योति याराजी ने अभ्यास के दौरान घुटने में दर्द और परेशानी महसूस होने के बाद महिलाओं की 100 मीटर हर्डल रेस की शुरुआती हीट से पहले नाम वापस ले लिया। घुटने की गंभीर चोट से वापसी कर रहे अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में चौथे स्थान पर रहे। किरण पाहल, एम पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज की महिला 4 × 400 मीटर रिले टीम ने एथलेटिक्स का एकमात्र गोल्ड दिलाया। टेनिस में भारतीय खिलाड़ी 40 साल में पहली बार बिना किसी मेडल के लौटे।
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इन खेलों में अच्छा रहा प्रदर्शन
तीरंदाजी में कुमकुम मोहोद ने व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। वह व्यक्तिगत रिकर्व में एशियन गेम्स का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। भारत ने तीरंदाजी में 5 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते। हांगझोऊ में भी तीरंदाजी टीम ने इतने ही मेडल दिलाए थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रिकर्व तीरंदाजों ने सभी 5 स्पर्धाओं में मेडल जीते जिसमें 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज शामिल रहा। इसे साउथ कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की भारत की मजबूत क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
कुश्ती में भारत ने 6 मेडल जीते, जिसमें 2 गोल्ड थे। सुजीत कलकल और अमन सहरावत ने गोल्ड मेडल की राह में ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियंस को हराया। ग्रीको रोमन वर्ग में नितेश सिवाच और सुनील कुमार ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिससे कुश्ती का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा।
गोल्फ में भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। प्रणवी उर्स एशियन गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। प्रणवी, अदिति अशोक और दीक्षा डागर की महिला टीम ने सिल्वर मेडल जीता, जिससे भारत ने एशियन गेम्स में पहली बार महिला टीम गोल्फ मेडल हासिल किया।
मुक्केबाजी ने भी भविष्य के लिए उम्मीद जगाई। परवीन हुड्डा ने 22 महीने के निलंबन के बाद शानदार वापसी करते हुए महिलाओं के 65 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता। हांगझोऊ में जीता उनका ब्रॉन्ज मेडल निलंबन के कारण उनसे छिन गया था। लवलीना बोरगोहेन ने हांगझोऊ के सिल्वर मेडल को इस बार गोल्ड में बदला, जबकि अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में एक और गोल्ड भारत की झोली में डाला।
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हॉकी और क्रिकेट में कायम रहा दबदबा
हॉकी में भारतीय महिला टीम ने 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। उसने फाइनल में गत चैंपियन चीन को 1-0 से हराया। लालरेमसियामी ने निर्णायक गोल किया, जबकि गोलकीपर बिचु देवी ने शानदार प्रदर्शन किया और अनुभवी सविता पूनिया ने पूरे अभियान में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस गोल्ड से भी बड़ी उपलब्धि थी 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई करना। पुरुष टीम ने भी एशियन गेम्स का खिताब बरकरार रखा और लॉस एंजेलिस का टिकट हासिल किया। पाकिस्तान के खिलाफ रोमांचक सेमीफाइनल में 4-3 की जीत के बाद भारतीय पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को हराया।
क्रिकेट ने भारत के अभियान को शानदार अंदाज में समाप्त किया। भारत ने पुरुष फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19 रन से हराकर गोल्ड मेडल बरकरार रखा। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम ने दबाव भरे मुकाबले में अपना धैर्य बनाए रखा। इससे पहले भारतीय महिला टीम ने भी गोल्ड मेडल जीता था। इस तरह भारत ने दोनों क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया।
