भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद कहा कि यह सपना सच होने जैसा है। मीराबाई ओलंपिक से लेकर वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे हर बड़े इवेंट में मेडल जीत चुकी थीं लेकिन एशियाड में वह अब तक पोडियम फिनिश से दूर थीं। उन्होंने बुधवार (23 सितंबर) को विमेंस 49 किलोग्राम वर्ग में कुल 198 किलोग्राम वजन उठाकर इस इंतजार को खत्म किया। टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार उठाया।
यह भारत का 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के ब्रॉन्ज जीतने के बाद वेटलिफ्टिंग में पहला एशियाड मेडल है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद मीराबाई ने, 'एशियन गेम्स में मेडल जीतना सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले 12 सालों से, 2014 के एशियन गेम्स से ही इस मेडल के लिए कोशिश कर रही थी। इस मेडल के साथ मेरी लाइफ कम्पलीट हो गई है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। ये मेरे सपनों के एशियन गेम्स हैं।'
यह भी पढ़ें: Asian Games: जय मीणा सेमीफाइनल में हारे, ब्रॉन्ज अपने नाम कर रचा इतिहास
इस बार सपना पूरा हुआ - मीराबाई
मीराबाई ने 2014 में अपने पहले एशियन गेम्स में नौवां स्थान हासिल किया था। वह पीठ की चोट के कारण 2018 के एशियाड में भाग नहीं ले पाई थीं, जबकि पिछले एशियन गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीं। बुधवार को वह अपनी मां के उपहार में दिए गए ओलंपिक रिंग की तरह के सोने के झुमके पहने और बालों में तिरंगे का रिबन लगाए मेडल जीतने की जिद के साथ मंच पर पहुंचीं।
मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियन गेम्स में अपना पहला मेडल जीता। सिल्वर मेडल पक्का होने के बाद उन्होंने अपना आखिरी प्रयास नहीं लिया।
मीराबाई ने कहा, 'जब से मैंने वेटलिफ्टिंग में कदम रखा तब से मेरा सपना एशियन गेम्स में मेडल जीतना रहा है। एशियन गेम्स से पहले या उसके दौरान कुछ न कुछ होता रहा लेकिन इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया।'
यह भी पढ़ें: Asian Games: भारत ने स्कीट टीम इवेंट में जीते 2 मेडल, मनु भाकर ने किया निराश
2028 ओलंपिक पर क्या बोलीं मीराबाई?
मीराबाई यह मेडल जीतने के लिए इतनी कमिटेड थीं कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के अगले दिन ही वह अभ्यास में लग गई थीं। अब उनका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक में मेडल जीतना होगा। उन्होंने कहा, 'मैंने अभी तक लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए अपनी रणनीति तय नहीं की है। क्वालिफिकेशन प्रक्रिया दिसंबर में शुरू होगी। मैं कुछ समय तक इस मेडल का जश्न मनाऊंगी और फिर फैसला करूंगी।'
