केंद्र सरकार ने देश में खेलों को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) के लिए अगले पांच वर्षों में 36,441 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस आजादी के बाद का सबसे बड़ा खेल विकास कार्यक्रम बताया है।
नई योजना के तहत खेलो इंडिया के लिए 29,054 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए 7,387 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सरकार का मकसद है कि देश के हर कोने से निकलने वाली खेल प्रतिभाओं को बेहतर ट्रेनिंग, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले। इसके साथ ही 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारियों को भी और मजबूत किया जाएगा।
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खिलाड़ियों को मिलेगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
सरकार के अनुसार, यह बजट पिछले खेलो इंडिया कार्यक्रम की तुलना में करीब आठ गुना अधिक है। इस राशि का उपयोग खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, पोषण, आधुनिक खेल उपकरण, खेल विज्ञान की सुविधाएं और विदेशी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के लिए किया जाएगा। राष्ट्रीय खेल महासंघों को भी प्रशिक्षण शिविर, राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी।
स्कूलों से शुरू होगी नई खेल प्रतिभाओं की तलाश
सरकार ने देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए दो नई योजनाएं शुरू करने का फैसला किया है, जिसमें खेलो इंडिया फीडर स्कूल (KIFS) और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय (KIUV) शामिल है। इन योजनाओं का मकसद स्कूल स्तर पर ही हुनरमंद बच्चों की पहचान करना और उन्हें शुरुआत से ही बेहतर ट्रेनिंग देना है। इसके साथ ही इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIAs) नाम से एक नई कैटेगरी भी बनाई जाएगी। इसके जरिए हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रोफेशनल कोचिंग, बेहतर सुविधाएं और लंबे समय तक विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा।
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महिलाओं, पैरा खिलाड़ियों और स्वदेशी खेलों पर रहेगा खास फोकस
नई योजना में महिला खिलाड़ियों, पैरा एथलीटों और स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार एक यूनिफाइड डिजिटल स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म भी तैयार करेगी, जहां खिलाड़ियों का डेटा, प्रतियोगिताएं, कोचिंग, फंडिंग और प्रदर्शन से जुड़ी सभी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। इससे नए टैलेंट को ढूंढना आसान होगा, खिलाड़ियों का चयन ज्यादा पारदर्शी तरीके से हो सकेगा और पूरे खेल तंत्र का बेहतर प्रबंधन हो पाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत भविष्य में ओलंपिक और पैरालंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए और मजबूत होगा, साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा।
