भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्राज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए 5 जून को नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया था। प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय बने। 20 साल के प्रज्ञानानंदा ने फाइनल राउंड में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की थी। प्रज्ञानानंदा ने टूर्नामेंट की शुरुआत अच्छी नहीं की थी लेकिन बाद के मुकाबलों में उन्होंने जबरदस्त वापसी की। इस दौरान उन्होंने वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया।
प्रज्ञानानंदा भारत के दूसरे ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार शिकस्त दी। इससे पहले 2007 में विश्वनाथन आनंद ने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में हराया था। प्रज्ञानानंदा की इस सफलता के बाद ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल करने वाले पहले भारतीय प्रवीण थिप्से ने बड़ा दावा किया है। थिप्से ने प्रज्ञानानंदा को कार्लसन से भी ज्यादा खतरनाक खिलाड़ी बताया है।
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गुकेश-एरिगैसी से भी आगे हैं प्रज्ञानानंदा
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित ग्रैंडमास्टर थिप्से का मानना है कि प्रज्ञानानंदा भारत के सबसे मजबूत खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश और अर्जुन एरिगैसी से आगे हैं। थिप्से ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा, 'प्रज्ञाननंदा इस समय बेस्ट भारतीय चेस खिलाड़ी हैं। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक प्रतिद्वंद्वियों में से एक माना जा सकता है। यहां तक कि मैं उन्हें कार्लसन से भी अधिक खतरनाक खिलाड़ी मानता हूं।'
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थिप्से ने प्रज्ञानानंदा की नॉर्वे चेस में मिली जीत को हालिया सालों में किसी भारतीय खिलाड़ी द्वारा हासिल की गई बेस्ट उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, 'प्रज्ञानानंदा ने क्या शानदार हो वापसी की है। पिछले साल वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन अब उन्होंने सच में असाधारण प्रदर्शन किया है। भारतीय चेस को इसी तरह के प्रदर्शन की जरूरत थी।'
थिप्से ने कहा, 'कुछ साल पहले तक वह अधिक आक्रामक होकर खेलते थे लेकिन अब उन्होंने विरोधी खिलाड़ी की चालों को कुंद करना सीख लिया है।'
