समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी को करीब चार साल बाद लखनऊ के पॉश डालीबाग इलाके में स्थित उनकी आलीशान कोठी का कब्जा वापस मिल गया है। गैंगस्टर एक्ट के तहत साल 2022 में इस संपत्ति को सीज कर सील कर दिया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को प्रशासन ने कोठी की सील खोल दी और अंसारी परिवार को संपत्ति का कब्जा सौंप दिया।
कब्जा वापस दिलाने की कार्रवाई के दौरान अफजाल अंसारी अपने परिवार के साथ मौके पर मौजूद रहे। तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की। अधिकारियों ने सील खोलने के साथ पंचनामा तैयार किया और संपत्ति की पैमाइश भी की। इसके बाद जमीन और मकान का वास्तविक कब्जा अंसारी परिवार को दे दिया गया।
यह भी पढ़ें: मलेरिया से बचाव की दवा बनी जानलेवा? 52 लोग पहुंचे अस्पताल, 7 साल की बच्ची की मौत
6,700 वर्ग फीट के प्लॉट पर बनी है कोठी
डालीबाग में करीब 6,700 वर्ग फीट के प्लॉट पर यह आलीशान मकान बना हुआ है। संपत्ति फरहत अंसारी के नाम पर दर्ज है। तत्कालीन गाजीपुर जिलाधिकारी के आदेश पर 23 से 28 अक्टूबर 2022 के बीच गाजीपुर पुलिस की टीम लखनऊ पहुंची थी। टीम ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 14(1) के तहत मकान को सीज कर सील कर दिया था। इसके बाद संपत्ति की देखरेख और प्रशासनिक निगरानी की जिम्मेदारी लखनऊ नगर आयुक्त को सौंप दी गई थी।
फरहत अंसारी ने संपत्ति की जब्ती के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। अप्रैल 2025 में गाजीपुर की स्पेशल गैंगस्टर कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डालीबाग स्थित यह मकान गैंगस्टर गतिविधियों या अपराध से अर्जित संपत्ति नहीं है। कोर्ट ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को मकान की सील खोलकर 30 दिनों के भीतर इसे फरहत अंसारी को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि, तय समय में मकान की सील नहीं खोली गई। इसके बाद फरहत अंसारी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
यह भी पढ़ें: BJP विधायक और पूर्व मंत्री अनिल शर्मा का कैंसर से निधन, 63 की उम्र में गंवाई जान
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई
फरहत अंसारी की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने हाई कोर्ट में पक्ष रखा। न्यायमुर्ति सीडी सिंह की एकल पीठ ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को पांच सप्ताह के भीतर कारण सहित आदेश जारी करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गाजीपुर जिला प्रशासन ने लखनऊ नगर आयुक्त और तहसील प्रशासन को मकान की सील खोलकर संपत्ति वापस करने के लिए पत्र भेजा। इसके बाद बुधवार को तहसीलदार की मौजूदगी में कोठी की सील खोली गई और जमीन व मकान का कब्जा अफजाल अंसारी और उनके परिवार को सौंप दिया गया।
