हिमाचल प्रदेश की देवभूमि कुल्लू में बुधवार से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज होगा। ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आयोजित होने वाले सात दिवसीय देव महाकुंभ का शुभारंभ दोपहर बाद राज्यपाल कविंद्र गुप्ता करेंगे। 21 से 27 अक्तूबर तक चलने वाले इस उत्सव में देव आस्था, सदियों पुरानी परंपराओं, हिमाचली लोक संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। उत्सव के लिए दशहरा समिति ने कुल्लू जिले के 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया है। मंगलवार शाम तक 200 से अधिक देवी-देवता अपने देवलुओं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ ढालपुर पहुंच चुके थे।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण बुधवार शाम चार बजे निकलने वाली भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा होगी। इससे पहले विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे देवी-देवता भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी लगाएंगे। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद रथयात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान ढोल-नगाड़ों, करनाल, नरसिंघा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच पूरा ढालपुर मैदान देवमय हो उठेगा।
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कुल्लू दशहरा की विशेषता यह है कि देश के अधिकांश हिस्सों में विजयदशमी पर दशहरा उत्सव संपन्न हो जाता है, जबकि कुल्लू में इसी दिन से सात दिवसीय आयोजन की शुरुआत होती है। यहां भगवान रघुनाथ को उत्सव का केंद्र माना जाता है और घाटी के देवी-देवता उनके सम्मान में ढालपुर पहुंचते हैं। यही परंपरा कुल्लू दशहरा को देश के दूसरे दशहरा उत्सवों से अलग पहचान देती है।
347 देवी-देवताओं को दिया निमंत्रण
कुल्लू दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि घाटी की देव संस्कृति और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस वर्ष दशहरा समिति ने 347 देवी-देवताओं को उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इनमें घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के आराध्य देवी-देवता शामिल हैं। इनके साथ आने वाले देवलुओं, कारदारों, पुजारियों और पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों से ढालपुर में अलग ही माहौल बनता है। देवताओं की पालकियों को पारंपरिक तरीके से सजाया जाता है। देव वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच जब अलग-अलग क्षेत्रों के देवी-देवता ढालपुर पहुंचते हैं, तो यह दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बन जाता है। देव समाज के लिए यह आयोजन अपनी परंपराओं को निभाने, आपसी मेलजोल बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है।
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माता हिडिंबा के आगमन के बाद आगे बढ़ेंगी रस्में
कुल्लू दशहरा की परंपराओं में माता हिडिंबा की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उत्सव के पहले दिन भगवान रघुनाथ की ओर से माता हिडिंबा को निमंत्रण स्वरूप छड़ी भेजे जाने की परंपरा है। इसके बाद माता हिडिंबा रघुनाथ मंदिर पहुंचेंगी और धार्मिक रस्मों में भाग लेंगी। माता हिडिंबा की उपस्थिति को उत्सव की प्रमुख परंपराओं में गिना जाता है। देव समाज की मान्यताओं के अनुसार, कुल्लू दशहरा की विभिन्न रस्में निर्धारित परंपराओं के अनुरूप निभाई जाती हैं। यही वजह है कि आधुनिक व्यवस्थाओं और बढ़ते पर्यटन के बावजूद इस उत्सव का पारंपरिक स्वरूप आज भी लोगों को आकर्षित करता है।
इस बार कुल्लू दशहरा में धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों के साथ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्यों और देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा विदेशी कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन में ग्लोबल डांस कार्यक्रम के तहत विभिन्न देशों की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ ड्रोन और लेजर शो जैसे आधुनिक आकर्षण भी उत्सव को नया आयाम देंगे। आयोजकों का प्रयास है कि कुल्लू की पारंपरिक देव संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित करवाया जाए।
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दुल्हन की तरह सजा ढालपुर, कारोबारियों में भी उत्साह
दशहरा उत्सव के स्वागत के लिए कुल्लू शहर और ऐतिहासिक ढालपुर मैदान को सजाया गया है। बाजारों, प्रमुख मार्गों और आयोजन स्थलों पर सजावट की गई है। रंग-बिरंगी रोशनी और उत्सवी माहौल ने शहर की रौनक बढ़ा दी है। उत्सव के लिए व्यापारियों ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन से स्थानीय कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
होटल, टैक्सी, रेहड़ी-फड़ी, हस्तशिल्प और अन्य कारोबार से जुड़े लोगों के लिए दशहरा हर वर्ष महत्वपूर्ण अवसर लेकर आता है। हालांकि, इस बार उत्सव के दौरान ढालपुर में रेहड़ी-फड़ी लगाने को लेकर निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करना होगा। कुल्लू दशहरा में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जहां देव परंपराओं के दर्शन होंगे, वहीं स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और हिमाचली संस्कृति को करीब से जानने का अवसर भी मिलेगा।
सुरक्षा के लिए 1265 जवान तैनात
उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किए हैं। आयोजन के दौरान कुल 1265 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात रहेंगे। इनमें 1125 पुलिसकर्मी और 140 होमगार्ड जवान शामिल हैं।
ढालपुर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी के लिए 155 सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन की मदद ली जाएगी। भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्सव क्षेत्र को छह सेक्टरों में बांटा गया है। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए 430 पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई है। इसके अतिरिक्त प्रमुख स्थानों पर जांच और निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
27 अक्तूबर को होगा समापन
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 27 अक्तूबर तक चलेगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के शामिल होने का कार्यक्रम है। सात दिनों तक ढालपुर में देव आस्था, पारंपरिक रस्मों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम रहेगी। कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा एक बार फिर देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। बुधवार को भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुरू होने वाला यह उत्सव कुल्लू की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देव आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और सामूहिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
