बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह का आरक्षण को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात करने वालों पर सवाल उठाते हुए चारों पीठ के शंकराचार्य की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। आनंद मोहन ने एक जनसभा में कहा कि जो लोग कहते हैं कि आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि क्या चारों पीठ के शंकराचार्य आर्थिक आधार पर बैठे हैं? क्या उनकी नियुक्ति गरीबी देखकर हुई है?

 

आनंद मोहन ने कहा, 'शंकराचार्य की नियुक्ति जाति के आधार पर होती रही है। सदियों से यह पद एक ही वर्ग के पास रहा है और किसी गरीब या दलित-पिछड़े को इस पद पर बैठने का मौका नहीं मिला। अगर आरक्षण गलत है तो सबसे पहले वहां से जाति के आधार पर मिलने वाला फायदा खत्म होना चाहिए। अगर योग्यता की बात होती है तो शंकराचार्य के पद के लिए भी प्रतियोगिता होनी चाहिए। रामायण, गीता, उपनिषद, वेद और महाभारत का सबसे बड़ा जानकार कौन है, सबसे ज्यादा चरित्रवान और विद्वान कौन है इसका पता लगाया जाए। जो जीते उसे शंकराचार्य बनाया जाए। इससे पता चलेगा कि ज्ञान बड़ा है या जाति।'

 

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हिंदू राष्ट्र पर भी उठाए सवाल

आनंद मोहन ने हिंदू राष्ट्र की बात करने वालों से भी सवाल किया। उन्होंने कहा, 'जो लोग पूरे हिंदू समाज की बात करते हैं उन्हें बताना चाहिए कि क्या हिंदू समाज में सिर्फ एक ही जाति है। हिंदू समाज में पासवान, रविदास, पंडित, ठाकुर, वैश्य, यादव और कुर्मी समेत कई जातियां हैं। अगर सभी हिंदू एक हैं तो सबको बराबर का हक क्यों नहीं मिलता? मंदिर के गर्भगृह से लेकर धर्म की बड़ी गद्दी तक सबको हक क्यों नहीं है? अगर सभी हिंदू एक हैं तो आरक्षण को लेकर दो तरह की बातें क्यों की जाती हैं?'

 

आनंद मोहन ने EWS आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग चाहते हैं कि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का आरक्षण खत्म हो जाए लेकिन उनका 10 प्रतिशत EWS आरक्षण बना रहे।' उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताया। उन्होंने कहा, 'अगर कोई अपना आरक्षण बचाकर रखना चाहता है और दूसरे का आरक्षण खत्म करने की बात करता है तो यह सही नहीं है। आरक्षण पर बहस हो तो सभी तरह के आरक्षण पर बात होनी चाहिए।'

 

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आरक्षण पर सबके लिए एक नियम

आनंद मोहन ने कहा, 'अगर आरक्षण खत्म करना है तो सबका खत्म किया जाए। सिर्फ दलितों और पिछड़ों का आरक्षण क्यों खत्म किया जाए? अगर आरक्षण खत्म होगा तो EWS भी खत्म होना चाहिए और शंकराचार्य की नियुक्ति में जाति के आधार पर होने वाली व्यवस्था पर भी सवाल उठना चाहिए।' उनके मुताबिक, कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए।

 

उनके बयान के बाद आरक्षण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। हाल की रिपोर्टों में भी आनंद मोहन के आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और इसके लाभ को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने से जुड़े बयान सामने आए हैं।