दिल्ली में चुनाव आयोग और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ चुकी है। जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि SIR की प्रक्रिया के तहत अरविंद केजरीवाल का नाम ही वोटर लिस्ट में नहीं है। जबकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया, साथ ही बताया कि SIR की प्रक्रिया के तहत अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के लोगों को नोटिस भेजा गया था। ताकि अरविंद केजरीवाल और परिवार की जानकारी को वेरिफाई किया जा सके।
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के वोटर लिस्ट में अरविंद केजरीवाल का नाम गायब है। जानकारी के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल समेत उनकी पत्नी सुनीता को नोटिस भेजा गया। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल के पिता राम केजरीवाल, मां गीता देवी और केजरीवाल के बेटे को नोटिस भेजा गया है। जिन्हें फिलहाल के लिए SIR अनमैप्ड कैटेगरी में रखा गया है।
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SIR प्रक्रिया में अरविंद केजरीवाल का नाम अनमैप्ड कैटेगरी में रखा गया है। अनमैप्ड कैटेगरी में मतदाताओं के नाम तब रखे जाते हैं, जब वोटरों की जानकारी SIR के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है। इसी वजह से अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों को नोटिस भेजा गया, जिसके बाद अरविंद केजरीवाल को वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
AAP ने लगाया आरोप
जब चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजा, तब पार्टी ने एक्स अकाउंट से चुनाव आयोग को टैग कर सवाल किए। आम आदमी पार्टी ने साफ तौर कहा, 'क्या देश में सब कुछ केवल सुप्रीम लॉर्ड को खुश करने के लिए किया जाता है। यह कैसे हो सकता है कि 3 बार मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल का नाम वोटर लिस्ट से गायब है।'
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चुनाव आयोग ने दिया जवाब
इस मामले को लेकर चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने जवाब दिया है। एनडीटीवी इंडिया के मुताबिक, चुनाव आयोग के अधिकारी ने पार्टी के दावों को खारिज किया, साथ ही बताया कि अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया, बल्कि सिर्फ नोटिस भेजा गया।
नई दिल्ली के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ने बताया कि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होगा। जिन लोगों का वोटर लिस्ट में नाम नहीं है, वे लोग 30 सितंबर तक फॉर्म के जरिए नाम शामिल करवा सकते हैं।
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रेखा गुप्ता को भेजा था नोटिस
इस मामले को लेकर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर ने बताया कि SIR की प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस जारी किया था। इसकी वजह थी उनके माता-पिता की उम्र और उनकी उम्र में अंतर होना। उनकी जानकारी को वेरिफाई करने के बाद उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल किया गया।
