हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के सलूणी उपमंडल में एक भालू सिंचाई टैंक में फंस गया। किहार पंचायत के घुडेई गांव में हुई इस घटना से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। टैंक में फंसा भालू बाहर निकलने के लिए लगातार छटपटाता रहा। भालू बाहर निकलने के लिए बच्चों की तरह रोने लगा। उसे इस हालत में देखकर ग्रामीण भी घबरा गए।
जानकारी के अनुसार घुडेई गांव में बने सिंचाई टैंक में किसी तरह भालू जा गिरा। टैंक में फंसने के बाद उसने बाहर निकलने के लिए काफी मशक्कत की, लेकिन सफलता नहीं मिली। भालू की आवाजें सुनकर और उसे टैंक में फंसा देखकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई। लोगों के लिए यह स्थिति एक ओर हैरान करने वाली थी तो दूसरी ओर भालू की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई थी।
सूचना मिलते ही हरकत में आया वन विभाग
घटना की जानकारी वन विभाग तक पहुंचने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर भालू को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया। विभागीय टीम के प्रयासों से भालू को टैंक से बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों के आसपास स्थित गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही आम है। ऐसे में खुले या असुरक्षित सिंचाई टैंक वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकते हैं। घुडेई गांव की इस घटना ने भी ऐसे जलस्रोतों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत को उजागर किया है।
ग्रामीणों से भी अपील है कि अगर कोई वन्यजीव इस तरह फंसा हुआ दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे खुद निकालने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से उसका रेस्क्यू कर सके। राहत की बात यह रही कि समय रहते वन विभाग ने कार्रवाई की और भालू को सुरक्षित जंगल में पहुंचा दिया।
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खुले सिंचाई टैंक वन्यजीवों के लिए बन सकते हैं खतरा
पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों के आसपास बने सिंचाई टैंक और जल भंडारण संरचनाएं कई बार वन्यजीवों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। पानी की तलाश में या अनजाने में इनके पास पहुंचने वाले जानवर फिसलकर अंदर गिर सकते हैं। यदि टैंक की दीवारें ऊंची हों और बाहर निकलने के लिए सीढ़ी या कोई दूसरा रास्ता न हो, तो वन्यजीव अंदर फंस सकते हैं।
घुडेई गांव की घटना भी इसी तरह की संभावित समस्या की ओर ध्यान दिलाती है। ऐसे हादसों से बचाव के लिए सिंचाई टैंकों को सुरक्षित ढंग से ढकना, उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था करना और जरूरत के अनुसार बाहर निकलने के लिए उपयुक्त ढलान या निकास मार्ग बनाना उपयोगी हो सकता है। संबंधित विभागों को ऐसे जलस्रोतों का निरीक्षण कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
भालू दिखे तो नजदीक जाने की न करें गलती
पहाड़ी क्षेत्रों में भालू सहित अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि कोई भालू किसी टैंक, गड्ढे या अन्य स्थान पर फंसा दिखाई दे तो उसे खुद निकालने का प्रयास करना खतरनाक हो सकता है। डरा हुआ या घायल वन्यजीव अचानक आक्रामक हो सकता है। ऐसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और भीड़ लगाने, शोर मचाने या जानवर को उकसाने से बचना चाहिए।
वन विभाग को तुरंत सूचना देकर प्रशिक्षित टीम के आने का इंतजार करना चाहिए। रेस्क्यू के दौरान भीड़ को दूर रखना जरूरी है, ताकि वन्यजीव और आम लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। घुडेई गांव में भालू के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत महसूस की। यह घटना बताती है कि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ गांवों के आसपास मौजूद जल संरचनाओं को सुरक्षित बनाना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
