भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि सरकार दिवंगत परिवार को आर्थिक सहायता देगी और उनके एक परिजन को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तय किया है कि भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी और उनके घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।
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सम्राट ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी जारी है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का मकसद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। सरकार के इस फैसले के बाद भरत तिवारी के परिवार ने राहत की सांस ली है। परिवार ने कहा कि अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
24 जुलाई को सीएम से मिले थे परिजन, रखी थी अपनी पीड़ा
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने 24 जुलाई को उनके परिवार से मुलाकात की थी। इस दौरान भरत की मां आशा देवी, बहन रूबी तिवारी और भाभी सुमन देवी सीएम आवास पहुंची थीं। परिजनों ने मुख्यमंत्री के सामने घटना के बाद अपनी परेशानी और मामले से जुड़ा पक्ष रखा था।
उन्होंने कहा कि भरत का एनकाउंटर फर्जी तरीके से किया गया। परिवार को 6 महीने से न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने परिजनों की बात ध्यान से सुनी और उन्हें भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी। सीएम ने कहा था कि सरकार इस संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
अब तक 1 जवान गिरफ्तार, एसएचओ और एसडीएम पर भी गिरी गाज
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब तक पुलिस ने सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। भोजपुर पुलिस ने इस कार्रवाई में शामिल एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ कर मामले की अन्य कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
इस मामले में तत्कालीन जगदीशपुर थानाअध्यक्ष राजेश मालाकार पर भी कार्रवाई हुई है। एनकाउंटर के बाद उन्हें सस्पेंड किया गया है। बाद में उन्हें पटना में मद्य निषेध विभाग में डीएसपी की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन भरत तिवारी के परिवार की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार ने राजेश शर्मा को फिर से लाइन क्लोज कर दिया है। जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीम संजीत कुमार पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। उन्हें उनके पद से हटाकर पटना मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।
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जांच जारी, विपक्ष भी कर रहा सवाल
जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने राहत का ऐलान किया है, लेकिन मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस और आयोग दोनों स्तर पर जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट आते ही आगे का फैसला लिया जाएगा। यदि रिपोर्ट में और लोगों के नाम आते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि 6 महीने बाद भी सिर्फ एक गिरफ्तारी हुई है। मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। भरत तिवारी के परिजनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। परिवार की मांग है कि जल्द से जल्द आर्थिक सहायता और नौकरी की प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही मामले में शामिल सभी दोषियों को जेल भेजा जाए। अब सबकी नजर जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
