बिहार के किसानों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार अब खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने के लिए ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने जा रही है। इससे किसानों को लंबे समय तक स्थिर आय का मौका मिलेगा। साथ ही देश की खाद्य तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। कृषि विभाग ने इसके लिए नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) योजना का विस्तार किया है।

 

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के किसानों की आय बढ़ाना और खेती में नए विकल्प जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। ऑयल पाम एक लंबे समय में तैयार होने वाली फसल है। इससे किसानों को अतिरिक्त और स्थिर आय का मौका मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को पौध सामग्री, सिंचाई और उत्पादन से लेकर उपज की खरीद, प्रसंस्करण और बाजार तक की पूरी सुविधा मिले।

 

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क्यों जरूरी है ऑयल पाम की खेती

भारत आज भी अपनी खाद्य तेल की जरूरत का करीब 56 से 57 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसके लिए हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में बिहार जैसे राज्यों में ऑयल पाम की वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा मिलने पर खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे किसानों को भी फायदा मिलेगा।

 

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बिहार के उन जिलों की पहचान की है जहां की जलवायु ऑयल पाम की खेती के लिए सही है। पहले चरण में अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में योजना लागू की जाएगी। बाद में इसे दूसरे उपयुक्त जिलों में भी बढ़ाया जाएगा। किसानों को ऑयल पाम की खेती से जोड़ने के लिए सरकार आर्थिक मदद देगी। NMEO-OP योजना के तहत ऑयल पाम की खेती करने वाले किसानों को पौध सामग्री खरीदने के लिए 29 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता दी जाएगी।

 

पौधे लगाने के बाद शुरुआती 4 साल तक फसल के रखरखाव के लिए भी सरकार मदद करेगी। इस दौरान खाली जमीन में दूसरी फसल उगाने के लिए 10 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर का विशेष अनुदान भी मिलेगा। इससे किसानों को शुरुआती समय में पौधों की देखभाल और खेती का खर्च उठाने में मदद मिलेगी।

 

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कीमत घटने पर भी किसानों को राहत

अक्सर किसानों को चिंता रहती है कि बाजार में कीमत कम होने पर उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा। इसी चिंता को दूर करने के लिए सरकार ने वीएबिलिटी प्राइस की व्यवस्था की है। अगर कच्चे पाम तेल की कीमत बाजार में गिरती है तो केंद्र सरकार तय नियमों के अनुसार अंतर की रकम की भरपाई करेगी। इससे किसानों को कीमत में गिरावट के समय राहत मिल सकेगी।

 

इसके अलावा ऑयल पाम की खेती में पानी की बेहतर व्यवस्था के लिए ड्रिप सिंचाई पर भी तय मानकों के अनुसार अनुदान दिया जाएगा। कटाई और प्रसंस्करण से जुड़े कृषि यंत्रों पर भी सब्सिडी मिलेगी। इससे किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। किसानों की बड़ी चिंता अपनी उपज बेचने को लेकर होती है। इस योजना में इसका भी ध्यान रखा गया है। किसानों द्वारा तैयार किए गए ऑयल पाम के फ्रेश फ्रूट बंच की खरीद के लिए संबंधित उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों के साथ सीधा और स्थिर तालमेल बनाया जाएगा।

 

इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा। कंपनियां सीधे खेत से उपज खरीदेंगी। इससे राज्य में ऑयल पाम की खेती से लेकर प्रसंस्करण तक की पूरी व्यवस्था विकसित हो सकती है। साथ ही, निजी निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इससे तेल मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों को भी बढ़ावा मिलेगा।