बिहार की राजधानी पटना में अब रामलीला और रावण वध का मंच बदलने वाला है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि मरीन ड्राइव के पास रामलीला मैदान बनाया जाएगा। अगले साल मार्च तक मरीन ड्राइव के पास तीन बड़े मैदान तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक मैदान का नाम रामलीला मैदान रखा जाएगा। यहीं गांधी मैदान से रामलीला और रावण वध के कार्यक्रम को पूरी व्यवस्था के साथ शिफ्ट किया जाएगा। मार्च 2027 तक दशहरा कमेटी ट्रस्ट को यह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा।
मुख्मंत्री पटना के गांधी मैदान में आयोजित श्रीकृष्ण महोत्सव ‘कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस महोत्सव का आयोजन दशहरा कमेटी ट्रस्ट, पटना की ओर से कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार और सात्विका ग्रुप के सहयोग से किया गया।
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1955 से हो रही रामलीला
मुख्यमंत्री ने कहा, 'दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव और रावण वध का आयोजन कर रहा है।' समिति की ओर से लंबे समय से रामलीला और रावण वध के लिए अलग जगह उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी। सरकार ने उनकी मांग को गंभीरता से लिया है। इसको लेकर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। मार्च के बाद जैसे ही नए मैदान का हैंडओवर होगा समिति को यह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'मरीन ड्राइव के पास तीन बड़े मैदान विकसित किए जा रहे हैं। इससे पटना को एक नया सांस्कृतिक केंद्र मिलेगा और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए स्थायी व्यवस्था हो सकेगी। इससे गांधी मैदान पर भी दबाव कम होगा।'
मुख्यमंत्री ने कहा, 'भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की जीत का संदेश दिया। महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया और कौरवों से केवल पांच गांव देने की बात कही लेकिन अन्याय के कारण युद्ध टल नहीं सका। भगवान श्रीकृष्ण का स्पष्ट संदेश था कि जो अन्याय करेगा उसका विनाश निश्चित है। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। आज भी भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समाज को सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों से बिहार की सनातन और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलती है।' इसके लिए मुख्यमंत्री ने दशहरा कमेटी ट्रस्ट को बधाई दी।
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बाढ़ पर सरकार का प्लान
मुख्यमंत्री ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'पिछले 10 वर्षों में इस समय गंगा में पानी का स्तर काफी अधिक है। गंगा बेसिन वाले जिलों में अधिकारियों और मंत्रियों को लगाया गया है और सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है। सोन और गंडक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। नेपाल की तराई से आने वाले पानी के कारण बिहार के लोगों को हर साल परेशानी का सामना करना पड़ता है।'
सरकार ने कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है। केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारे सड़क निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा ताकि बरसात के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके।
