बिहार की राजधानी पटना में दलित और आदिवासी समाज ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू किया है। ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ के बैनर तले गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च की शुरुआत हुई है। गांधी मैदान में बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग जुटे हैं। पूरे मैदान में जय भीम के नारे गूंज रहे हैं। हाथों में नीले झंडे और संविधान की प्रतियां लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि आज चाहे जो स्थिति बने वे राजभवन तक मार्च करेंगे और वहां घेराव करेंगे। गांधी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च जेपी गोलंबर, डाकबंगला और इनकम टैक्स चौराहा होते हुए राजभवन की ओर बढ़ेगा।
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क्या हैं आंदोलनकारियों की मांगें
इस आंदोलन की कई बड़ी मांगें हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में एससी-एसटी प्लान की राशि को दूसरे विभागों में खर्च करने पर रोक लगाना शामिल है। उनका आरोप है कि दलित और आदिवासी समाज के विकास के लिए आने वाले बजट को दूसरे विभागों में खर्च कर दिया जाता है। इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की जा रही है।
दूसरी बड़ी मांग आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की है ताकि आरक्षण को कानूनी चुनौतियों से बचाया जा सके। इसके अलावा दलितों की हत्याओं पर रोक लगाने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। आंदोलनकारी कॉलेजियम सिस्टम को खत्म करने और लेटरल एंट्री पर रोक लगाने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेजियम सिस्टम और लेटरल एंट्री से आरक्षित वर्ग के लोगों का हक मारा जा रहा है। इसमें पारदर्शिता नहीं है। इसलिए इसे खत्म कर सभी नियुक्तियों में आरक्षण लागू किया जाए।
सुबह से ही गांधी मैदान में लोगों का जुटना शुरू हो गया था। बिहार के अलग-अलग जिलों से लोग इस आंदोलन में शामिल होने पहुंचे हैं। कई लोग बसों और ट्रेनों से आए हैं। लोग ‘जय भीम, जय संविधान’ के नारे लगा रहे हैं। आंदोलन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम अपने हक के लिए आए हैं। संविधान ने हमें जो अधिकार दिया है उसे बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है। आरक्षण बढ़ना चाहिए, घटाना नहीं चाहिए।' वहीं, एक अन्य आंदोलनकारी ने कहा, 'दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं और हत्याएं हो रही हैं। सरकार को इस पर सख्त कानून बनाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय देना चाहिए।'
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पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
आंदोलन को देखते हुए पटना पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे रूट पर 2000 से अधिक पुलिस बल की तैनाती की गई है। गांधी मैदान से लेकर राजभवन तक जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और पुलिस की सुरक्षा गाड़ी भी तैनात की गई हैं। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी तय मार्ग से आगे बढ़ें और कानून-व्यवस्था बनी रहे। ट्रैफिक पुलिस ने भी वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की है ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। पटना पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है लेकिन कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। राजभवन के आसपास सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। इसके अलावा प्रदर्शन पर ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।
इस पूरे आंदोलन को लेकर दलित समाज के नेता अमर आजाद ने कहा, 'यह आंदोलन सिर्फ एक दिन का नहीं है बल्कि आरक्षण और संविधान बचाने की लंबी लड़ाई है। सरकार हमारी मांगों को अनसुना कर रही है इसलिए हमें सड़क पर उतरना पड़ा है। एससी-एसटी सब प्लान का पैसा दलितों के विकास पर ही खर्च होना चाहिए। उसे दूसरे मद में खर्च करना संविधान के साथ धोखा है। आज हम शांतिपूर्ण तरीके से राजभवन तक जाएंगे और राज्यपाल को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और पूरे बिहार में चक्का जाम किया जाएगा।'
फिलहाल गांधी मैदान में सभा चल रही है। सभा के बाद लोग जुलूस के रूप में राजभवन की ओर कूच करेंगे। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और इनकम टैक्स चौराहे पर विशेष बैरिकेडिंग की गई है।
