बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस एंड इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने बिल्डिंग निर्माण विभाग के इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी के ठिकानों पर छापेमारी की है। विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने पटना और पूर्णिया में उनसे जुड़े तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। इस दौरान घर और कार्यालय में संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक लेनदेन और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।

 

बताया जा रहा है कि टीमों ने पूर्णिया और पटना में एक साथ कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि सत्येंद्र कुमार चौधरी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कितनी संपत्ति है। साथ ही इन संपत्तियों को खरीदने या बनाने में कितनी रकम खर्च हुई और उसका स्रोत क्या है इसकी भी जांच की जा रही है।

 

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पटना में दो जगह छापेमारी

विजिलेंस की टीमों ने पटना में दो और पूर्णिया में एक ठिकाने पर तलाशी ली। पूर्णिया में इंजीनियर के कार्यालय और आवास से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। जमीन और मकान के कागजात, बैंक खातों में हुए लेनदेन और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले गए। जांच टीम यह भी देख रही है कि अधिकारी की घोषित आय के मुकाबले उनके पास कितनी संपत्ति है। इसके लिए वेतन, बैंक में जमा रकम, जमीन-मकान, निवेश और परिवार के सदस्यों से जुड़ी संपत्तियों का मिलान किया जा रहा है।

 

पटना के फुलवारी शरीफ स्थित मकान की भी जांच की गई है। इसके अलावा AG कॉलोनी स्थित आवास से जुड़े कागजात भी जांच के दायरे में हैं। अधिकारी इन संपत्तियों के मालिकाना हक और इन्हें खरीदने या बनाने में खर्च हुई रकम से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। विजिलेंस की जांच में सत्येंद्र कुमार चौधरी, उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों के नाम से जुड़ी संपत्तियों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

 

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दस्तावेजों की जांच जारी

सत्येंद्र कुमार चौधरी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में FIR दर्ज होने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट लिया गया था। इसके बाद पटना और पूर्णिया में एक साथ तलाशी की कार्रवाई की गई। फिलहाल टीम को मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जमीन, मकान, बैंक खाते और निवेश से जुड़े कागजात का मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही संपत्ति और आय के बीच अंतर की पूरी जानकारी सामने आएगी।

 

टीम बरामद और मिले दस्तावेजों की जांच कर रही है। किसी संपत्ति या बैंक खाते का जांच में सामने आना अपने आप में अवैध संपत्ति साबित नहीं करता। इसके लिए संपत्ति के स्रोत और अधिकारी की वैध आय का मिलान किया जाएगा।