उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में दुष्कर्म और गैंगरेप के झूठे मुकदमे दर्ज कराकर लोगों से रकम वसूलने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह में 3 महिलाएं थीं, जो लोगों को अपने जाल में फंसाती थीं। इस केस में कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, 3 अन्य की तलाश जारी है।
करीब 10 अन्य संदिग्ध भी पुलिस की जांच के घेरे में हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच में बिजनौर और अमरोहा के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए 11 झूठे मुकदमों का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि इन मामलों में महिलाओं के बयान और मुकदमों की भाषा शैली भी काफी हद तक एक जैसी पाई गई। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक जल निगम बरेली में तैनात अवर अभियंता मोहम्मद अहसान ने प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी कि उनके खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराया गया है। इसी तरह 5 अन्य लोगों ने भी पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर ऐसी ही शिकायतें कीं। इन 6 शिकायतों की जांच एएसपी गौतम राय को सौंपी गई। जांच आगे बढ़ी तो झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने के पीछे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई।
सरगना समेत 5 गिरफ्तार, 3 की तलाश
स्वाट और शहर कोतवाली पुलिस की कार्रवाई में गिरोह के सरगना जुल्फिकार उर्फ बब्बू लंगड़ा निवासी चांदपुर की चुंगी, जन्नत कॉलोनी, अफजाल निवासी भागूवाला, गुड्डी निवासी लड़ापुरा बिजनौर, कुंती निवासी मोहल्ला कस्साबान और प्रीति निवासी बिजनौर को गिरफ्तार किया गया। वहीं पारुल निवासी लड़ापुरा, रामकली निवासी बिजनौर और अन्नू निवासी मोहल्ला रेती, किरतपुर की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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2 से 3 लाख रुपये तक की होती थी मांग
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले लोगों को दुष्कर्म के फर्जी मुकदमों में फंसाता था। इसके बाद मुकदमा वापस लेने के नाम पर दो से तीन लाख रुपये तक की रकम मांगी जाती थी। गिरोह का इस्तेमाल केवल वसूली के लिए ही नहीं होता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दुष्कर्म के मुकदमों के जरिए जमीन, मकान और लेन-देन के विवादों में दूसरे पक्ष पर दबाव बनाकर मनचाहा फैसला कराने की कोशिश की जाती थी।
अमरोहा में भी दर्ज कराए गए फर्जी केस
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने अमरोहा के हसनपुर, रहरा और अमरोहा देहात थाने में झूठे मुकदमे दर्ज कराए। इसके अलावा अमरोहा की अदालत में तीन परिवाद भी दाखिल कराए गए। बिजनौर में हीमपुर दीपा, मंडावली और स्योहारा थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। बिजनौर की अदालत में भी एक परिवाद दाखिल कराया गया। पुलिस के अनुसार इन मामलों में दर्ज कराई गई प्राथमिकी कोर्ट के आदेश के जरिए हुई थी।
एक जैसी भाषा से पुलिस को हुआ शक
जांच के दौरान पुलिस को फर्जी मुकदमों में एक और समानता मिली। अलग-अलग मामलों में दर्ज शिकायतों की भाषा शैली और घटनाओं का विवरण काफी हद तक एक जैसा था। कई शिकायतों में महिलाओं ने बताया कि वे दवाई लेने या बाजार जाने के लिए निकली थीं। पुलिस जांच में इन मामलों में बाद में फाइनल रिपोर्ट लगने की बात सामने आई। यानी आरोपपत्र अदालत में दाखिल नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार खुद को दुष्कर्म पीड़िता बताने वाली महिलाओं ने मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया था और मामलों में तकनीकी साक्ष्य भी नहीं मिले।
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मंडप कारोबारी ने भी लिया था गिरोह का सहारा
बिजनौर शहर के एक मंडप कारोबारी का मामला भी पुलिस जांच में सामने आया है। आरोप है कि कारोबारी ने गिरोह से संपर्क कर थाना हीमपुर दीपा में भट्ठा स्वामी आशीष अग्रवाल और अन्य लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आशीष अग्रवाल पक्ष दबाव में आया और मंडप कारोबारी की फंसी रकम वापस कर दी गई। बाद में इस मामले को खत्म करा दिया गया।
पुलिस के मुताबिक मंडप कारोबारी भी फिलहाल जांच के दायरे में है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। प्राथमिक जांच में सामने आए 11 मामलों के अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने और कितने लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाया और उनसे कितनी रकम वसूली।
