उत्तर प्रदेश में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों के लिए परिवहन विभाग ने नियमों में बड़ी सख्ती कर दी है। अब ड्राइविंग टेस्ट में फेल होने के बाद आवेदक केवल दोबारा शुल्क जमा कर कुछ दिन बाद फिर परीक्षा नहीं दे सकेगा। फेल होने वाले आवेदक को पहले ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर में प्रवेश लेकर एक माह का अनिवार्य प्रशिक्षण लेना होगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देने का रास्ता खुलेगा। नई व्यवस्था का मकसद बिना पर्याप्त दक्षता के लाइसेंस हासिल करने की कोशिशों पर रोक लगाना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।

 

अभी तक स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट में फेल होने वाले आवेदक को दोबारा परीक्षा देने के लिए 300 रुपये शुल्क जमा करना होता था। इसके बाद करीब एक सप्ताह बाद उसे फिर ड्राइविंग टेस्ट देने का मौका मिल जाता था। यानी फेल होने के बाद दोबारा प्रशिक्षण लेने की कोई अनिवार्यता नहीं थी। अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। नए प्रावधान के तहत फेल आवेदक को पहले प्रशिक्षण लेना होगा और उसके बाद ही दोबारा परीक्षा दे सकेगा।

6 हजार रुपये देकर 1 माह की ट्रेनिंग

नई व्यवस्था में ड्राइविंग टेस्ट में असफल आवेदक को ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर में एक माह का प्रशिक्षण लेना होगा। इसके लिए छह हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान आवेदक को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार वाहन चलाने का अभ्यास कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोबारा टेस्ट देने पहुंचने वाला आवेदक वास्तव में वाहन चलाने में दक्ष हो चुका हो।

 

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परिवहन विभाग के मुताबिक प्रदेश के 17 जिलों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर संचालित हैं। लखनऊ के अलावा मैनपुरी, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, अलीगढ़, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, पीलीभीत, बिजनौर, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद और सोनभद्र में भी ऐसे सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ड्राइविंग दक्षता की जांच की जाती है।जिन जिलों में अभी ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर नहीं हैं, वहां फिलहाल वर्तमान व्यवस्था के तहत ही स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाएंगे। जैसे-जैसे नए केंद्र तैयार होंगे, नई प्रक्रिया का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। परिवहन विभाग की कोशिश है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए।

दलालों का खेल भी होगा मुश्किल

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर दलालों की सक्रियता भी लंबे समय से चर्चा में रही है। टेस्ट पास कराने, आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने या लाइसेंस जल्दी बनवाने के नाम पर आवेदकों से सरकारी शुल्क से अलग रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, दलालों द्वारा वसूली जाने वाली रकम की कोई एक तय दर नहीं है। अलग-अलग मामलों में अलग रकम लिए जाने की शिकायतें होती हैं ।नई व्यवस्था में टेस्ट की प्रक्रिया अधिक निर्धारित होने और फेल आवेदक के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाने से दलालों के जरिए सीधे टेस्ट पास कराने की गुंजाइश कम होने की उम्मीद है।

 

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बार-बार फेल होने वालों को अब सुधारना होगा ड्राइविंग कौशल

नई व्यवस्था का सीधा असर उन आवेदकों पर पड़ेगा जो बिना पर्याप्त तैयारी के ड्राइविंग टेस्ट देने पहुंचते हैं। पहले फेल होने के बाद 300 रुपये जमा करके दोबारा टेस्ट देना अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन अब असफल होने पर एक माह का प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। इससे आवेदक को अपनी ड्राइविंग की कमियां दूर करने का पर्याप्त समय मिलेगा।सड़क सुरक्षा पर परिवहन विभाग का जोरपरिवहन विभाग का मानना है कि ड्राइविंग लाइसेंस केवल परीक्षा पास करने की औपचारिकता नहीं होना चाहिए।

 

लाइसेंस पाने वाला व्यक्ति सड़क पर वाहन चलाने में सक्षम भी हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से ड्राइविंग टेस्ट में असफल होने वालों के लिए प्रशिक्षण को अनिवार्य किया गया है यानी अब डीएल टेस्ट में फेल होने के बाद 300 रुपये जमा करके एक सप्ताह में दोबारा टेस्ट देने का आसान रास्ता खत्म होगा। पहले छह हजार रुपये देकर एक माह का प्रशिक्षण लेना होगा, इसके बाद ही दोबारा ड्राइविंग टेस्ट का मौका मिलेगा।