20 प्रतिशत एथेनॉल युक्त यानी E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। एक तरफ सरकार और कंपनियों के दावे हैं तो दूसरी तरफ आम ग्राहकों की समस्याएं। अब इस बीच छत्तीसगढ़ की एक कंज्यूमर कोर्ट ने E20 पेट्रोल से जुड़े एक मामले में जो फैसला सुनाया है, वह देशभर में चर्चा का विषय बन सकता है। कंज्यूमर कोर्ट ने माना है कि E20 से गाड़ी में खराबी आई इसलिए या तो नई गाड़ी दी जाए वरना पूरे के पूरे 20 लाख रुपये लौटाए होंगे। शिकायतकर्ता ने कहा था कि उनकी कार में E20 पेट्रोल डाले जाने की वजह से खराबी आई।

 

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले की सुनवाई के बाद कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी को आदेश दिए हैं कि वह पीड़ित पक्ष को ऐसी कार दे जिसमें E20 पेट्रोल डाला जा सके। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो उसे कार की पूरी कीमत यानी 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे। आयोग ने ग्राहक की मानसिक प्रताड़ना के एवज में 1 लाख रुपये का मुआवजा भी देने का फैसला सुनाया है।

क्या है पूरा मामला?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस केस में पीड़ित शख्स का नाम डॉक्टर प्रेमराज देब्ता है। जून 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा खरीदने वाले प्रेमराज देब्ता की गाड़ी में जब बार-बार खराबी आई तो उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट में इसकी शिकायत की। इस मामले में यह भी सामने आया है कि उनकी कार E20 पेट्रोल के लिए कंपैटिबल ही नहीं थी यानी उसमें E20 पेट्रोल नहीं डाला जा सकता था। 

 

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इसकी एक वजह थी कि भले ही गाड़ी जून 2024 में खरीदी गई हो लेकिन वह बनी जनवरी 2023 में ही थी। जब इस गाड़ी में E20 पेट्रोल डाला गया तो उसमें दिक्कत आने लगी। कई बार तेल पलटना पड़ा, टैंक की सफाई करानी पड़ी लेकिन दिक्कत दूर नहीं हुई। जब प्रेमराज देब्ता अपनी गाड़ी सर्विस सेंटर ले गए तो बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट है। उन्होंने सरकारी लैब में जांच कराई तो पता चला कि टैंक में सफेद दही जैसा कुछ जमा था और वह एथेनाल निकला। शिकायतकर्ता का कहना है कि कार खरीदते समय उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनकी गाड़ी में E20 पेट्रोल नहीं डाला जा सकता है।

 

इस बारे में नेक्सा के मैनेजर ने कोर्ट में कहा कि पेट्रोल के कारण समस्या हुई और हर बार साफ करवाने के बाद भी पेट्रोल में गड़बड़ी पाई गई। उनका यह भी कहना था कि बाहरी कारकों के कारण गड़बड़ी हुई जो कि किसी भी स्थिति में वारंटी का हिस्सा नहीं है।

 

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कंज्यूमर फोरम ने क्या कहा?

अब आयोग ने माना है कि कार कंपनी और डीलर ने शिकायतकर्ता को E20 वाली कार नहीं दी जो कि गलत था। आयोग ने अब कहा है कि कंपनी उनकी गाड़ी वापस ले और उसी मॉडल की E20 वाली कार दे। कंपनी को यह काम 45 दिन के अंदर करना होगा। अगर 45 दिन में ऐसा नहीं होता है तो कार की पूरी कीमत लौटानी होगी। इसके लिए, मूल कीमत 18,29,000 रुपये, RTO फीस के 1,86,850 और इंश्योरेंस के कुल 34,644 रुपये मिलाकर 20, 50,494 रुपये बनते हैं।

 

साथ ही, आयोग ने यह भी कहा है कि बार-बार गाड़ी खराब होने, सर्विस सेंटर जाने के लिए मजबूर होने और असुविधा झेलने की वजह से शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है इसलिए उन्हें 1 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, कानूनी लड़ाई लड़ने पर खर्च हुए 10 हजार रुपये भी लौटाए जाएं। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि अगर 45 दिन में इस आदेश का पालन नहीं होता है तो 7 प्रतिशत की दर से ब्याज लगाया जाएगा।