सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाया और यहां तक कह दिया कि यूपी पुलिस को भंग कर देना चाहिए। सर्वोच्च अदालत की तीखी टिप्पणी के बाद सूबे में सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले दिन से ही सरकार का रवैया भेदभाव वाला रहा है। 

 

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस का बचाव किया। लखनऊ के लोक भवन में आयोजित पुलिस सम्मान समारोह में कहा कि बंद चैंबर में टिप्पणी करना आसान होता है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले क्या स्थिति थी। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले मफिया और अपराधियों के आगे सत्ता में बैठे लोग नाक रगड़ते थे। 

 

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उन्होंने कहा, 'बंद चैंबर के सुखद माहौल में तभी चिंतन कर सकते हैं, जब बेहतरीन सुरक्षा का माहौल हो। कोई भी व्यक्ति हो, कितना भी बड़ा क्यों न हो, पद का गुरूर क्यों न हो, अगर उसकी सुरक्षा बाहर कर दी जाए तो उसे 'भीगी बिल्ली' बनने में बहुत देर नहीं लगेगी।'

 

 

 

 

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, 'क्या स्थिति थी 2017 के पहले... पॉलिटिकल लीडरशिप में अगर निर्णय लेने का सामर्थ्य न हो, उसकी रीढ़ टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था की स्थिति को सीधा कैसे करती। राज्य सरकार की जो अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है, उसे यूपी पुलिस प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है।'

पीडीए समाज से सबसे अधिक भेदभाव: अखिलेश यादव

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा पहली बार नहीं कहा है। समय-समय पर पहले भी इस तरह की टिप्पणियां हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों और सरकार पर जुर्माना लगाया है। सरकार ने पहले ही दिन से भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है। उसको कोर्ट ने कई बार संज्ञान में लिया है। सबस ज्यादा भेदभाव पीडीए समाज से किया गया।'

 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई की। यह आपराधिक मामले से जुड़ा केस था। यूपी पुलिस ने एफआईआर में आरोपी का नाम खाली छोड़ दिया था। बाद में मनमर्जी से नाम जोड़ भी दिया। पुलिस के इस रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि कानून-व्यवस्था के खिलाफ चल रहा व्यवहार हर हाल में बंद होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी लापरवाही पर तो यूपी पुलिस को ही भंग कर देना चाहिए।