पहले कांग्रेस फिर आम आदमी पार्टी और फिर से कांग्रेस में मौजूद विधायक सुखपाल सिंह खैरा इन दिनों AAP पर हमलावर हैं। वह आरोप लगा रहे हैं कि पंजाब सरकार के मंत्रियों को मिले सरकारी बंगलों में बाहरी लोग रह रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने AAP नेता गायत्री बिश्नोई और मनीष सिसोदिया को घेरा था। अब सुखपाल खैरा ने आरोप लगाए हैं कि जब वह AAP में थे और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्हें बंगला मिला था तो उन्हें भी बंगला देने को कहा गया था। सुखपाल खैरा के मुताबिक, जब उन्होंने अपना सरकारी मकान देने से इनकार कर दिया तभी उन्हें पद से हटा दिया गया था।
पंजाब की भुलत्थ विधानसभा सीट से तीसरी बार के विधायक सुखपाल सिंह खैरा 2017 से 2022 तक AAP के विधायक रहे। हालांकि, 2019 में ही उन्होंने AAP से इस्तीफा दे दिया था। उसी साल उन्होंने कुछ अन्य विधायकों के साथ मिलकर पंजाबी एकता पार्टी बनाई थी। जून 2021 में वह एक बार फिर कांग्रेस में लौट आए और 2022 में भुलत्थ से ही चुनाव लड़े। 2007 में शिरोमणि अकाली दल की नेता बीबी जागीर कौर को हराकर पहली बार विधायक बने सुखपाल खैरा 2012 में उनके खिलाफ ही चुनाव हार गए थे।
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2017 में सुखपाल खैरा ने अकाली दल के युवराज भुपिंदर सिंह और कांग्रेस के रणजीत सिंह राणा को हराकर चुनाव जीता था। 2022 में वह कांग्रेस में लड़े और उसी के टिकट पर चुनाव लड़कर एक बार फिर से बीबी जागीर कौर और रणजीत सिंह राणा के खिलाफ चुनाव जीत गए। 2019 में AAP छोड़ने के बाद से ही सुखपाल खैरा AAP के खिलाफ लगातार हमलावर हैं। अब वह आरोप लगा रहे हैं कि दिल्ली में हारने के बाद AAP के सभी नेता पंजाब आ गए हैं और मंत्रियों ने अपने बंगले उनके लिए खाली कर दिए हैं।
6 साल पुरानी बात क्यों बता रहे सुखपाल खैरा?
अब AAP के मंत्रियों के सरकारी बंगले को लेकर सवाल उठा रहे सुखपाल खैरा ने X पर लिखा है, 'दोस्तों, अब जबकि AAP द्वारा मंत्रियों के सरकारी मकानों का पूरी तरह सरेंडर किया जाना सार्वजनिक चर्चा में आ चुका है, मैं यह बात सार्वजनिक करना चाहता हूं कि 2017 में जब मैं पंजाब का नेता प्रतिपक्ष (LoP) था, तब केजरीवाल ने अपने लोगों के माध्यम से मेरे सरकारी मकान नंबर 500, सेक्टर 16, चंडीगढ़ का कब्ज़ा पार्टी कार्यालय के लिए मांगा था। मैंने इस मांग को साफ़ तौर पर ठुकरा दिया था। मैंने उसके लोगों से स्पष्ट कहा था कि संवैधानिक और प्रशासनिक मर्यादा इसकी अनुमति नहीं देती कि मैं नेता प्रतिपक्ष के रूप में मिले इस सरकारी मकान को पार्टी के काम के लिए सौंप दूं। यही मेरी LoP के पद से हटाए जाने के कारणों में से एक था।'
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उन्होंने आगे लिखा है, 'बाद में हरपाल चीमा जैसे रीढ़विहीन नेताओं ने अपना सेक्टर 39 वाला सरकारी मकान असंवैधानिक तरीके से सौंप दिया, जिससे आज दिल्ली के नेताओं को मंत्रियों के सरकारी मकानों पर कब्ज़ा करने का हौसला मिला है।'
बता दें कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस आक्रामक मोड में है और सुखपाल खैरा बंगलों के दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
