बिहार के औरंगाबाद जिले में एक एग्जीक्यूटिव अफसर (EO) की हत्या का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। पहले कहा गया कि अज्ञात बदमाशों ने डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के EO विमल कुमार की हत्या की लेकिन अब खुलासा हुआ है कि उनके ड्राइवर ने ही उनकी जान ले ली। ड्राइवर का कहना है कि टॉयलेट करने के लिए हुई बहस के चलते उसने ऐसा किया। ड्राइवर के कबूलनामे के बावजूद यह मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। विमल कुमार के परिवार ने सीधे-सीधे एक विधायक का नाम लेकर आरोप लगाए हैं जिससे यह मामला पेचीदा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव भी इस मामले में कूद गए हैं और उन्होंने बिहार के डीजीपी से न्याय की मांग करते हुए लिखा है कि मुख्यमंत्री से न्याय मांगना खुद को धोखा देने जैसा है क्योंकि वह तो खुद ही अपराधियों के संरक्षक हैं।
मामला शनिवार देर रात हुई एक हत्या का है। विमल कुमार के ड्राइवर मिथिलेश कुमार ने फोन करके सूचना दी कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने हमला किया और विमल की हत्या कर दी। मिथिलेश कुमार के मुताबिक, डेहरी आन सोन से पटना जाते समय यह हादसा बारुन नहर रोड के रास्ते पर हुआ। घायल अवस्था में विमल कुमार को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी मौत हो गई।
अलग-अलग कहानियों ने किया पेचीदा
इस मामले में पुलिस ने खुलासा किया है कि ड्राइवर मिथिलेश कुमार ने ही विमल कुमार पर लोहे की रॉड से हमला किया जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। बताया गया है कि पहले दोनों में किसी बात को लेकर बहस हुई थी और इसी के चलते मिथिलेश ने विमल को मार डाला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि विमल के शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। हालांकि, गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई है।
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पुलिस का कहना है कि छुट्टी नाम मिलने और ज्यादा काम करने की वजह से मिथिलेश परेशान था। इसी को लेकर विवाद हुआ और उसने हमला किया। फिर घटना को दूसरा रूप देने के लिए उसने गाड़ी को पानी में उतार दिया और खुद फोन करके जानकारी दी कि अज्ञात बदमाशों ने हमला कर दिया है।
इससे पहले, ड्राइवर ने बताया था कि अपाचे बाइक पर आए दो लोगों ने किया था। फिर उसने कहा कि एक ही हमलावर था। मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया है कि मिथिलेश अपना बयान लगातार बदल रहा था जिससे शक बढ़ता गया। जब पुलिस ने विस्तार से पूछताछ की तो उसने यह भी बताया कि वह रास्ते में टायलेट करने के लिए रुकना चाहता था लेकिन विमल ने उसे मना कर दिया। इसी को लेकर छगड़ा हुआ और उसने विमल को मार डाला।
विधायक पर लगे आरोप
इस मामले में एक स्थानीय विधायक का नाम आने से हड़कंप मचा हुआ है। विमल कुमार की पत्नी बबीता देवी ने आरोप लगाए हैं कि डेहरी के विधायक राजीव रंजन उर्फ सोनू सिंह उनके पति विमल कुमार से 50 लाख रुपये मांग रहे थे और इसी को लेकर हत्या करवा दी। बबीता देवी कहती हैं, 'रोज विधायक फोन करता था। रोज फोन करके तंग करता था। कहे थे कि 29 तारीख को जाएंगे। हमने कहा था कि कुछ बोलिएगा मत। रोज विधायक कहता था कि आइए मिलने, हमको 50 लाख दीजिए, 25 लाख दीजिए। इन्होंने कहा- हम गलत नहीं करते तो कहां से दें। हम तो बस सुनते थे कि यह (विमल कुमार) हां सर, हां सर करते थे। मैं कहती थी कि यहां से चलिए।'
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बबीता देवी ने आगे कहा है, '29 तारीख को मिलने गए थे और आकर बताते कि क्या बात हुई थी। मिथिलेश भी साथ गया था। मिथिलेश हमको फोन किया कि अपाचे वाला साहब को मारा है। हम चाहते हैं कि जितने लोग शामिल हैं, सबका नार्को टेस्ट करवाएं। जैसे हमारे साहब को मारा है, वैसे ही इन लोगों को मारो।'
आरोपों पर क्या बोले विधायक?
इन आरोपों के बारे में लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के विधायक सोनू सिंह ने कहा है, 'यह डेहरी विधानसभा के लिए एक निंदनीय घटना है। हम सभी शहीदों के नाम एक कार्यक्रम में मौजूद थे। वहां ईओ साहब भी थे। तबीयत खराब होने की बात कहकर वह वहां से निकल गए थे और हम लोग 9-10 बजे तक वहीं थे। हमें सूचना मिली तो हम फिर अस्पताल गए, वहां अधिकारी मौजूद थे। मैंने वहीं कहा कि जो भी दोषी है, उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। मैं डेहरी के विकास के लिए लगातार आवाज उठाता हूं। इस संदर्भ में उनसे भी मेरी वार्ता होती थी। किस परिस्थिति में उनकी पत्नी ने यह बात बोली है, मैं अपनी तरफ से कहता हूं कि जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'एक पत्नी का पति गया है, उस पर कोई राजनीति न करे। एक हत्या हुई है, उस पर लोग ओछी राजनीति कर रहे हैं। सोनू सिंह उनके परिवार के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा। मैं डेहरी के विकास की राजनीति करता हूं, ये सब ओछी राजनीति नहीं करता हूं। 29 जुलाई को ना तो उनसे बात हुई है, ना ही मैं उनसे मिला। समस्याओं को लेकर उनसे बात होती थी लेकिन इस तरह का घृणित काम नहीं कर सकता। हमारे पास समय नहीं रहता कि मैं किसी अधिकारी को रोज फोन करूं। कॉल डिटेल से सब पता चल ही जाएगा।'
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विमल कुमार को लेकर ही विधायक सोनू सिंह ने बिहार की विधानसभा में सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, 'हमारे यहां जो एग्जीक्यूटिव अफसर हैं, आपने कहानी सुनी होगी कि जब सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का। उन्होंने 50 लाख के भवन में 3 करोड़ का अपना दफ्तर बना लिया लेकिन नगर भवन नहीं बना। वहां की जनता त्राहिमाम स्थिति में है।'
बीजेपी और सम्राट चौधरी पर तेजस्वी का तंज
इस मामले पर RJD नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा है, 'बिहार में एनडीए के एक विधायक ने डेहरी-डालमिया नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी से 50 लाख रुपये की मांग की। मांग पूर्ति नहीं होने पर अधिकारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह बिहार की ध्वस्त विधि व्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण है। सम्मानीय नरेंद्र मोदी जी आपके ट्रबल इंजन सरकार में आपके MLA ने एक ईमानदार अधिकारी की बलि ली है। क्या ये कथित जंगलराज से अच्छा काम हुआ है? इस राज का कोई तो नामकरण कीजिए। शोक-संतप्त परिजन से मुलाक़ात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। शाम में दिवंगत अधिकारी की अंत्येष्टि में सम्मिलित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। DGP से निष्पक्ष जांच कर हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा देनी की मांग की। मुख्यमंत्री से न्याय और निष्पक्षता की अपेक्षा करना स्वयं को धोखा देना है क्योंकि वो तो ख़ुद ही अपराधियों के संरक्षक है।'
इस घटना के बाद बिहार के सभी एग्जीक्यूटिव अफसरों ने हड़ताल का एलान कर दिया है। उनका कहना है कि सभी अधिकारियों को गार्ड उपलब्ध कराए जाएं। बिहार नगर सेवा पदाधिकारी संघ की ओर से कहा गया है, 'कृष्ण भूषण कुमार की हत्या के बाद सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। संघ ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को गार्ड उपलब्ध कराने और अन्य मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने की बात कही है।'
