पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को लंबे इंतजार के बाद पैरोल मिल गई। उनकी मां का स्वास्थय खराब होने के कारण उनके लिए पैरोल की मांग की जा रही थी और खुद पंजाब के सीएम भगवंत मान ने उनकी पैरोल की सिफारिश की थी। हालांकि, जगतार सिंह हवारा ने दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से दी गई दो दिन की कस्टडी पैरोल की पेशकश ठुकरा दी है। उन्होंने इसके बजाय सामान्य पैरोल देने की मांग की है।
पूर्व सीएम बेअंत सिंह को चंडीगढ़ में 1995 में आत्मघाती हमले में मार दिया गया था। इस हमले की साजिश में कोर्ट ने जगतार सिंह हवारा को दोषी ठहराया था और वह फिलहाल दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। उनकी रिहाई की मांग पंजाब में कई संगठन लंबे समय से कर रहे हैं। अब उनकी 81 साल की मां की बीमारी के कारण उन्हें पैरोल देने की मांग तेज हो गई थी। ऐसे में जेल प्रशासन ने उनको दो दिन की कस्टडी पैरोल देने का फैसला किया है।
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कस्टडी पैरोल का प्रस्ताव ठुकराया
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल अधिकारियों ने सुरक्षा समीक्षा और कोर्ट के निर्देशों के बाद जगतार सिंब हवारा को दो दिन की कस्टडी पैरोल देने का प्रस्ताव रखा था। कस्टडी पैरोल में कैदी को सीमित अवधि के लिए जेल से बाहर ले जाया जाता है और उसके साथ हथियारबंद पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जगतार सिंह हवारा ने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि वह पुलिस सुरक्षा नहीं चाहता और नियमित यानी सामान्य पैरोल चाहता है।
सीएम ने की थी सिफारिश
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद पहले पत्र लिखकर और फिर पंजाब के गवर्नर से मुलाकात कर जगतार सिंह हवारा के लिए 10 दिन की पैरोल की मांग की है। भगवंत मान ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर मानवीय आधार पर पैरोल देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने यह भरोसा भी दिलाया कि पैरोल की अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पंजाब सरकार लेने को तैयार है।
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लंबे समय से पैरोल की मांग
हवारा की पैरोल याचिका लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में उलझी हुई है। जुलाई 2026 में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने अधिकारियों को उसकी पैरोल अर्जी पर समयबद्ध तरीके से फैसला लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, मंडोली जेल प्रशासन को आवेदन चंडीगढ़ के गृह सचिव के पास भेजना था, जिसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन को अपनी टिप्पणी या सिफारिश देनी थी और फिर जेल प्रशासन को तय समय में आवेदन पर फैसला करना था।
जगतार सिंह हवारा के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि वह करीब 29 साल की वास्तविक हिरासत पूरी कर चुका है और उसे अब तक पैरोल या रिमिशन का लाभ नहीं मिला है। याचिका में यह भी कहा गया कि जेल में उसके खिलाफ किसी तरह के दुर्व्यवहार या जेल अपराध की शिकायत नहीं रही है। हालांकि, सरकारी पक्ष ने उसकी पैरोल को लेकर सुरक्षा और अन्य मामलों से जुड़े पहलुओं का हवाला दिया था। अब जब सरकार ने सुरक्षा की गारंटी ली है तो उनकी पैरोल की मांग को मान लिया गया लेकिन अब जगतार सिंह हवारा कस्टडी पैरोल लेने से मना कर चुके हैं।
