उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक परिवार पर ऐसा दुखों का पहाड़ टूटा, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले अपने नए घर का सपना साकार करने में जुटे 50 वर्षीय ज्योति प्रकाश को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि उसी घर की नींव उनके जीवन की आखिरी मंजिल बन जाएगी। काम के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई। परिजन जब उनका शव लेकर घर पहुंचे तो 15 वर्षीय बेटा राज अपने पिता को उस हालत में देखकर सदमे से बेसुध होकर गिर पड़ा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसने भी दम तोड़ दिया। एक ही दिन में पिता और बेटे की मौत से पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और एक ही घर से दो अर्थियां उठीं।

 

मुंडेरवा थाना क्षेत्र के परसा हज्जाम गांव निवासी ज्योति प्रकाश प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले मकान की नींव भरवा रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक तेज पसीना आया और तबीयत बिगड़ गई। परिजन तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

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पिता का शव देखकर टूट गया बेटा

जब ज्योति प्रकाश का शव घर पहुंचा तो 15 वर्षीय राज अपने पिता को मृत अवस्था में देखकर गहरे सदमे में आ गया और वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन उसे भी अस्पताल लेकर दौड़े लेकिन डॉक्टर उसे नहीं बचा सके। डॉक्टरों के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में किशोर की मौत सदमे के कारण होने की आशंका है। अंतिम कारण चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

 

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गरीबी के बीच उजड़ गया परिवार

ग्राम प्रधान रजवंत यादव ने बताया कि ज्योति प्रकाश का परिवार बेहद आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले घर को लेकर परिवार में खुशी थी लेकिन घर बनने से पहले ही परिवार पर ऐसा दुख टूट पड़ा कि पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। अब गांव में हर जुबान पर सिर्फ इसी परिवार की दर्दभरी कहानी है।