मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां विभिन्न सरकारी और निजी गोदामों में रखा करीब 51,602 मीट्रिक टन सरकारी गेहूं बर्बाद हो गया। बर्बाद हुए इस अनाज की कुल कीमत लगभग 1,354.55 करोड़ रुपये आंकी गई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) की निरीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि समय पर कीटनाशकों का छिड़काव न होने के कारण यह पूरा अनाज कीड़ों की भेंट चढ़ गया और अब सड़कर लकड़ी के बुरादे में तब्दील हो चुका है।

 

यह वही अनाज था जिसे सरकार ने बिक्री सीजन में किसानों की मेहनत का मान रखते हुए 2,625 रुपये प्रति क्विंटल के MSP पर खरीदा था। इस बंपर स्टॉक को सुरक्षित रखकर आगे PDS के जरिए गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच सस्ते राशन के रूप में बांटा जाना था। इससे पहले ही अधिकारियों की अनदेखी के कारण गरीबों के मुंह का निवाला गोदामों में ही घुन और पतंगों का खाना बन गया।

 

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गोदामों को मिला भारी-भरकम किराया

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक मोर्चे पर सामने आया है। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन ने इस भारी-भरकम स्टॉक को सुरक्षित रखने के लिए निजी गोदामों को 81 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से किराए पर लिया था। इस एवज में विभाग द्वारा अनाज की मात्रा के अनुसार हर महीने 5 लाख से लेकर 12 लाख रुपये तक का भारी-भरकम किराया इन निजी वेयरहाउस मालिकों को जेब से चुकाया जा रहा था। सरकारी खजाने से पानी की तरह पैसा बहाए जाने के बावजूद गोदामों के भीतर पेस्ट-कंट्रोल की कोई सुध नहीं ली गई जिससे पूरा अनाज घुन कर बर्बाद हो गया।

 

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FCI और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम की संयुक्त जांच रिपोर्ट में बियावरा और नरसिंहगढ़ क्षेत्र के करीब 32 से 35 गोदामों को खराब पाया गया है। जहां हजारों मीट्रिक टन अनाज सड़ रहा है। आधिकारिक सूची के अनुसार, प्रमुख रूप से ममता वेयरहाउस, महि सरिता, जयश्री, विनायक, बाबा रामदेव, गायत्री, राम लॉजिस्टिक्स, श्रीराम वेयरहाउस, बालाजी, यादव और लक्ष्मी वेयरहाउस में रखा गेहूं कीड़ों से सबसे ज्यादा प्रभावित पाया गया है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि अब यह अनाज न तो इंसानों के खाने लायक बचा है और न ही इससे कोई दूसरा उपयोग लिया जा सकता है।