उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है लेकिन सरकारी आंकड़ों में मरीजों की संख्या कम दिखाई दे रही है। इसकी वजह संक्रमण कम होना है या महंगी जांच के कारण मरीज जांच से दूरी बना रहे हैं, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राजधानी में स्वाइन फ्लू से एक महिला की मौत हो चुकी है और 25 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर जांच के लिए 5,500 से 6,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। भारी शुल्क के कारण कई मरीज जांच कराए बिना ही लौट रहे हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में भी मुख्य रूप से गंभीर मरीजों के ही नमूने लिए जा रहे हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू के वास्तविक मामलों का आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है। 

राजधानी में अभी निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर स्वाइन फ्लू की जांच की दर तय नहीं हो सकी है। जिले में 250 से अधिक निजी पैथोलॉजी केंद्र हैं, लेकिन बड़ी लैब में ही स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध है। जांच के लिए मरीजों से 5,500 से 6,000 रुपये तक लिए जा रहे हैं। इतनी महंगी जांच होने के कारण लोग जांच करवाने से बच रहे हैं और कई मरीज बिना जांच कराए ही लौट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच की दर 700 से 900 रुपये तय की गई थी लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच के लिए अभी तक कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। यही कारण है कि निजी केंद्र अलग-अलग दरों पर जांच कर रहे हैं। 

निजी केंद्र संचालकों के साथ होगी बैठक

CMO डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक, निजी जांच केंद्र संचालकों के साथ मंगलवार को बैठक होगी। इसमें स्वाइन फ्लू की जांच की दर तय की जाएगी। इसके बाद निर्धारित कीमत से अधिक शुल्क वसूलने वाले निजी केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल KGMU, लोहिया संस्थान और SGPGI में स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है। सरकारी अस्पतालों से मरीजों के नमूने इन संस्थानों में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: 'मानदेय, स्कूटी, बस, आंगनबाड़ी...,' अखिलेश के सियासी दांव की BJP काट ढूंढ ली?

सरकारी अस्पतालों में आसान नहीं जांच कराना

स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में भी जांच की व्यवस्था सीमित है। यहां सी श्रेणी के मरीजों के ही नमूने लेने के आदेश दिए गए हैं। इनमें सांस फूलने और ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसे गंभीर लक्षण वाले मरीज शामिल हैं। इसके अलावा भर्ती मरीजों के नमूने लिए जा रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण हल्के लक्षण वाले मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। उन्हें निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है, जहां जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि जांच कराने वाले मरीजों की संख्या कम है और सरकारी आंकड़ों में भी स्वाइन फ्लू के मामले कम नजर आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शहर में फिलहाल बड़े निजी केंद्रों पर ही स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है। इन केंद्रों से पॉजिटिव आने वाले मामलों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेजी जा रही है। कई पैथोलॉजी केंद्र स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं और वहां जांच शुरू नहीं हुई है। ऐसे में एक तरफ महंगी जांच मरीजों को पीछे हटा रही है तो दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में केवल गंभीर मरीजों के नमूने लिए जा रहे हैं। इससे संक्रमण के वास्तविक प्रसार का आकलन करना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है। 

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण

स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द, बदन में दर्द, ठंड लगना और आंखों में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आमतौर पर दो से तीन दिन में लक्षण सामने आते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह अवधि सात दिन तक भी हो सकती है। H1N1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों से फैल सकता है। संक्रमित वस्तुओं या सतहों को छूने के बाद हाथ साफ न करने, हाथ मिलाने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

यह भी पढ़ें: SDM की बेटी को लगा एक्सपायरी इंजेक्शन, स्टोर प्रभारी और फार्मासिस्ट निलंबित

बचने के लिए क्या करें?

  • खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढककर रखें।
  • लोगों से करीब डेढ़ मीटर की दूरी बनाए रखें।
  • हाथ मिलाने से बचें।
  • संक्रमित वस्तु या सतह छूने के बाद हाथ अच्छी तरह साफ करें।
  • बुखार, खांसी या जुकाम जैसे लक्षण होने पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।