बिहार के बेतिया में इनरवा बॉर्डर पर चारपहिया और तीनपहिया वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए, जिसके बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने बॉर्डर पर प्रदर्शन करते हुए सड़क पर टायर जलाकर घंटों आगजनी की और आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने ठोरी और भिस्वा बॉर्डर की तर्ज पर इनरवा बॉर्डर से भी चारपहिया व तीनपहिया वाहनों का आवागमन बहाल करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बॉर्डर पर घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी।

 

 प्रदर्शनकारियों ने बॉर्डर पर टेंट लगाकर धरना भी शुरू कर दिया और छोटी भंसार की व्यवस्था शुरू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वाहनों के आवागमन पर रोक लगने से भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के काम, व्यापार और आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों से बेटी-रोटी का संबंध रहा है। ऐसे में सीमा पर आवागमन को लेकर उत्पन्न परेशानी का जल्द समाधान होना चाहिए।

 

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भारत-नेपाल के लोगों को हो रही परेशानी

बेतिया जिले के इनरवा बॉर्डर पर पिछले कुछ दिनों से चारपहिया और तीनपहिया वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इस रोक के बाद से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों में आक्रोश था, जो रविवार को फूट पड़ा। रविवार सुबह बड़ी संख्या में भारत और नेपाल के सीमावर्ती गांवों के लोग इनरवा बॉर्डर पर जुट गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों ने सड़क पर टायर जलाकर आगजनी की और सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। इससे बॉर्डर पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इनरवा बॉर्डर से रोजाना सैकड़ों लोग भारत से नेपाल और नेपाल से भारत आते-जाते हैं। कई लोगों के रिश्तेदार दोनों देशों में हैं। कई लोग रोजमर्रा के काम, खेती, मजदूरी और व्यापार के लिए बॉर्डर पार करते हैं लेकिन चारपहिया और तीनपहिया वाहनों पर रोक लगने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों को अब 20 से 25 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर ठोरी या भिस्वा बॉर्डर से आना-जाना पड़ रहा है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।

 

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लोगों ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों से बेटी-रोटी का संबंध रहा है। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं। शादी-ब्याह, मुंडन, जनेऊ जैसे सामाजिक कार्यों के लिए भी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में वाहनों पर रोक लगाना गलत है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब ठोरी और भिस्वा बॉर्डर से चारपहिया और तीनपहिया वाहनों का आवागमन हो सकता है, तो इनरवा बॉर्डर से क्यों नहीं। प्रशासन को इनरवा बॉर्डर पर भी उसी तरह की व्यवस्था करनी चाहिए।

छोटे व्यवसायियों को हो रही परेशानी

गाड़ियों के आवागमन पर रोक लगने से सबसे ज्यादा असर छोटे व्यवसायियों और दुकानदारों पर पड़ा है। इनरवा बॉर्डर के दोनों तरफ छोटे-छोटे बाजार हैं, जहां दोनों देशों के लोग खरीदारी करने आते हैं। भारत के लोग नेपाल से कपड़ा, जूता-चप्पल और रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं, तो नेपाल के लोग भारत से किराना, दवा और अन्य सामान खरीदते हैं। लेकिन वाहनों पर रोक लगने से बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम हो गई है और व्यापार ठप हो गया है।

 

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प्रदर्शनकारियों ने इनरवा बॉर्डर पर छोटी भंसार की व्यवस्था शुरू करने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि छोटी भंसार की सुविधा मिलने से सीमावर्ती क्षेत्र के छोटे व्यवसायियों, दुकानदारों और आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। अभी लोगों को बड़े भंसार कार्यालय जाना पड़ता है, जो काफी दूर है। छोटी भंसार खुलने से लोगों को सीमा पर ही कस्टम की सुविधा मिल जाएगी और वे आसानी से सामान ला-ले जा सकेंगे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बॉर्डर पर टेंट लगाकर धरना भी शुरू कर दिया। लोग टेंट के नीचे बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। टायर जलाकर आगजनी और सड़क जाम किए जाने से घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। आवागमन बाधित होने से राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई लोग जो नेपाल से भारत आ रहे थे या भारत से नेपाल जा रहे थे, वे जाम में फंस गए। उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।

बॉर्डर पर तनाव का माहौल

नेपाल के भरत सिंह क्षेत्री ने कहा कि सीमा पर वाहनों के आवागमन पर रोक से आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों को भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि इनरवा बॉर्डर से रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं और उनका व्यापार इसी बॉर्डर पर निर्भर है। वाहनों पर रोक लगने से व्यापार ठप हो गया है और लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है। उन्होंने दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों की सुविधा को देखते हुए जल्द व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से अच्छा संबंध रहा है और इसे बनाए रखना जरूरी है।

 

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इस मामले को लेकर नेपाल के डीएसपी भान कार्की से पूछे जाने पर उन्होंने कुछ भी कहने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च अधिकारियों का है और वे ही इस पर फैसला लेंगे। वहीं, भारतीय प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे। प्रदर्शन के दौरान बॉर्डर पर घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। टायर जलने से काला धुआं उठता रहा और सड़क पर जाम लगा रहा। राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ लोग जाम में फंसे रहे तो कुछ लोगों को वापस लौटना पड़ा।