गुजरात में 33 वर्षीय एक व्यक्ति को 76 साल की बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी रमेश वैधुकिया कुछ महीने पहले ही गुजरात हाई कोर्ट से 2018 में तीन साल की बच्ची के रेप और हत्या के मामले में बरी हुआ था। उस मामले में ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।
पुलिस के अनुसार, 76 वर्षीय महिला का शव 21 अगस्त को राजकोट-भावनगर हाईवे पर आजी डैम के पास मिला था। जांच के दौरान पुलिस ने करीब 13 किलोमीटर के रास्ते पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
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मंदिर के पास भीख मांगती थी बुजुर्ग महिला
पुलिस के मुताबिक, महिला राजकोट-अहमदाबाद हाईवे स्थित सत हनुमान मंदिर के पास भीख मांगकर गुजारा करती थी। उसके पोते ने बताया कि वह 19 अगस्त की सुबह उसे मंदिर के पास छोड़कर गया था। शाम को जब वह वापस आया तो महिला वहां नहीं थी। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला तो 20 अगस्त को कुवाडवा रोड पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। अगले दिन आजी डैम के पास मोगल माताजी मंदिर के नजदीक महिला का शव मिला। शुरुआत में पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था। बाद में महिला की पहचान होने के बाद जांच तेज की गई।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने महिला को घर छोड़ने की बात कहकर अपनी रिक्शा में बैठाया था। CCTV फुटेज में वह महिला को मंदिर के पास से रिक्शा में बैठाते हुए दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद वह महिला को अलग-अलग जगहों पर ले गया। पुलिस का आरोप है कि आरोपी ने एक सुनसान जगह पर महिला के साथ दुष्कर्म किया और डंडे से मारपीट की। इसके बाद उसी डंडे से पीटकर उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने शव को कपड़े में लपेटा और आजी डैम के पास फेंक दिया।
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2018 के मामले में मिली थी मौत की सजा
रमेश वैधुकिया के खिलाफ 2018 में राजकोट के थोराला पुलिस स्टेशन में तीन साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या का केस दर्ज हुआ था। मार्च 2020 में ट्रायल कोर्ट ने उसे इस मामले में दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद रमेश ने इस फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी। फरवरी 2026 में गुजरात हाई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस का पूरा मामला ज्यादातर परिस्थितिजन्य सबूतों पर टिका था और सबूतों की कड़ी में कई कमियां थीं। CCTV फुटेज भी पुलिस के दावों को पुख्ता तरीके से साबित नहीं कर पाई थी। इसके अलावा DNA सबूत और घटनास्थल के रीक्रिएशन से जुड़े दस्तावेजों में भी खामियां मिली थीं। इन सब वजहों से कोर्ट ने रमेश को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। अब पुलिस 76 साल की एक महिला की हत्या और रेप के मामले में रमेश के खिलाफ जांच कर रही है।
