हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के कर्मचारियों को पक्का करने की मांग अब तेजी पकड़ने लगी है। इस मांग के समर्थन में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल की ओर से बुधवार को राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के राज्य इकाई के तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे। HKRN हरियाणा सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है लेकिन अब इस योजना पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।
कांग्रेस के नेताओं ने HKRN को पक्के करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने सरकार से HKRN कर्मचारियों का कथित शोषण बंद करने और उन्हें नियमित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार पहले इन कर्मचारियों को नियमित करे और उसके बाद चाहे तो हरियाणा कौशल रोजगार निगम को बंद कर दे।
यह भी पढ़ें: 'पहले 10 हजार दो, फिर देंगे बिजली कनेक्शन,' JE और SSO गिरफ्तार को ACB ने पकड़ा
HKRN पर उठाए सवाल
अशोक अरोड़ा ने कहा कि HKRN के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की सेवाओं और सुविधाओं को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि नियमित कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं HKRN कर्मचारियों को नहीं मिल रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कर्मचारियों से काम तो लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। नेताओं ने कहा कि HKRN के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार दिया गया है, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार की सुरक्षा नहीं मिल रही है।
ठेके की व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान सरकार के विभागों, बोर्ड और निगमों में काम ठेके पर करवाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों में नियमित भर्तियों के बजाय ठेके और विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों से काम करवाया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को युवाओं को स्थायी रोजगार देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। कर्मचारियों को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में रखने के बजाय उनकी सेवाओं को नियमित करने की नीति बनाई जानी चाहिए।
HKRNL क्या है?
हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) हरियाणा सरकार की ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में जरूरत के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। इसका गठन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 13 अक्टूबर 2021 को किया गया था। सरकार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य पहले अलग-अलग निजी ठेकेदारों के जरिए होने वाली आउटसोर्सिंग में कर्मचारियों के कथित शोषण को कम करना और भर्ती व तैनाती की प्रक्रिया को ऑनलाइन, पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाना था।
इस योजना के तहत सरकारी संस्थानों की जरूरत के अनुसार क्लर्क, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ड्राइवर, तकनीकी कर्मचारी, हेल्पर, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी और कई अन्य कुशल व अर्ध-कुशल पदों पर नियुक्तियां हो सकती हैं। उम्मीदवारों का चयन निर्धारित योग्यता, अनुभव और सरकार के तय मानदंडों के आधार पर किया जाता है। HKRN का मॉडल कॉन्ट्रैक्ट आधारित है, यानी इसे सामान्य सरकारी स्थायी नौकरी के बराबर नहीं माना जाता। हालांकि, निगम के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक कर्मचारियों के वेतन भुगतान, EPF, ESI और अन्य लागू सामाजिक सुरक्षा लाभों को नियमों के अनुसार सुनिश्चित करने का प्रावधान है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगों में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार की मौत
कहां है दिक्कत?
HKRN के जरिए सरकारी विभागों और संस्थानों में एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात किया जा चुका है। अगस्त 2025 में विधानसभा में सरकार की ओर से 1,29,430 नियुक्तियों का आंकड़ा बताया गया था, जिनमें 22,867 नई नियुक्तियां और 1,06,563 पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को पोर्ट किया गया था। HKRN कर्मचारियों का विरोध मुख्य रूप से नौकरी की स्थायी सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर है। कर्मचारी संगठनों और विपक्ष का आरोप है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद कर्मचारी स्थायी नहीं हैं और नौकरी जाने का खतरा बना रहता है।
नियमित कर्मचारियों की तुलना में सैलरी, स्वास्थ्य सुविधा, छुट्टी, यात्रा भत्ता और अन्य लाभों को लेकर भी मांगें उठती रही हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को समय पर सैलरी भी नहीं मिलती। कई कर्मचारी तो महीनों सैलरी ना मिलने के बाद नौकरी छोड़ भी चुके हैं। इसके अलावा कर्मचारी संगठन HKRN को खत्म कर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी कर रहे हैं।
