नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हरियाणा सरकार अपने पुराने कर्ज पर लगने वाले ब्याज को नया कर्ज लेकर चुका रही है। 1 सितंबर को सीएजी ने हरियाणा विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा कि 2020 से 2025 के बीच हरियाणा सरकार ने अपने मौजूदा ऋण के 53 से 67 फीसद तक के हिस्से का इस्तेमाल पुराने कर्ज को चुकाने में किया। जबकि 2015 से 2020 तक 19 से 50% तक का फंड ही लोन चुकाने में खर्च होता था।

 

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'साल 2024-25 में चालू ऋण का 14% ही उपयोग पूंजीगत व्यय में किया गया। ऋण का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय के बजाय वर्तमान उपभोग और पुराने कर्ज के भुगतान में किया जा रहा था।'

 

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रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा पर आंतरिक ऋण वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जबकि पांच साल पहले 2020-21 में यह 2.04 लाख करोड़ रुपये था। मतलब साफ है कि पांच साल में हरियाणा का आंतरिक ऋण 1.07 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है, जो 52.24 फीसद का इजाफा है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में आंतरिक ऋण पर 21,936 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया।

 

बता दें कि आंतरिक ऋण में बाजार ऋण, आरबीआई से मिली अग्रिम राशि, राष्ट्रीय लघु बचत कोष की विशेष प्रतिभूतियां और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त कर्ज शामिल होता है। इसके अलावा सरकार ने 2024-25 में 11,639 करोड़ रुपये सब्सिडी में खर्च किया, जबकि 2020-21 में यह धनराशि 7,650 करोड़ रुपये थी।

 

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा की बकाया राजकोषीय देनदारियां 2024-25 में 3.61 लाख करोड़ रुपये हो गईं। वहीं 2015-16 में यह 1.21 लाख करोड़ रुपये थी। सार्वजनिक ऋण में से 3.16 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं।

 

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हरियाणा सरकार को 2024-25 से 2034-35 के बीच जितना ऋण चुकाना है, उसमें से 23,959 करोड़ रुपये 2025-26 में देना है। इसके अलावा 1.28 लाख करोड़ रुपये का अन्य कर्ज भी अदा करना है। 2026-27 से 2031-32 के बीच 1.64 लाख करोड़ रुपये की देनदारी है। हरियाणा को अगले सात साल यानी 2032 तक सार्वजनिक ऋण के पुनर्भुगतान में हर साल करीब 21,725 ​​करोड़ रुपये चुकाने होंगे।