हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को बढ़ावा देने के लिए एचआरटीसी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है। प्रदेश में 122 करोड़ रुपये की लागत से 80 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें से 34 जगहों पर काम पूरा हो चुका है जबकि 21 अन्य जगहों पर अगले एक महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य है। बाकी 25 जगहों पर भी काम चल रहा है।

 

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने एचआरटीसी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये चार्जिंग स्टेशन एचआरटीसी के बस अड्डों और वर्कशॉप में बनाए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग रूटों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों को आसानी से चार्जिंग की सुविधा मिलेगी और उनका संचालन बेहतर होगा।

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल में गरमाई चार्जशीट की सियासत, 2027 से पहले बढ़ी तकरार

80 जगहों पर बनेंगे 99 चार्जिंग प्वाइंट

प्रदेश में कुल 80 जगहों पर 99 चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं। इनमें 180 किलोवाट क्षमता वाले फास्ट CCS-2 चार्जर लगाए जाएंगे। चार्जिंग स्टेशन सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे। जरूरत के हिसाब से एचआरटीसी के दूसरे बस अड्डों और वर्कशॉप में भी इन्हें लगाया जाएगा।

 

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के साथ चार्जिंग सुविधा बढ़ाना आधुनिक और पर्यावरण के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बनाने की दिशा में जरूरी कदम है। एचआरटीसी इन सुविधाओं को धीरे-धीरे बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

 

यह भी पढ़ें: सारण में ऑर्केस्ट्रा से लौट रही थी डांसर, स्कूटी चालक ने किया दुष्कर्म

प्रदेश में चल रहीं 297 इलेक्ट्रिक बसें

एचआरटीसी के बेड़े में अभी 297 इलेक्ट्रिक बसें हैं। ये बसें छोटे और लंबे दोनों रूटों पर चल रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से निगम को डीजल खर्च में करीब 15 से 16 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे बसों के संचालन का खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है।

 

आम तौर पर एक इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज होने के बाद करीब 180 किलोमीटर तक चल सकती है। हालांकि हरोली से चंडीगढ़ के करीब 270 किलोमीटर लंबे रूट पर भी इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्जिंग के बाद सफलतापूर्वक चल रही है। इसी तरह शिमला-चंडीगढ़-शिमला के करीब 250 किलोमीटर लंबे रूट पर बस यात्रा पूरी करने के बाद भी करीब 25 प्रतिशत बैटरी बचा रही है।सरकार का कहना है कि चार्जिंग नेटवर्क बढ़ने से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और आसान होगा। इससे हिमाचल में किफायती, आधुनिक और पर्यावरण के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।