उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रविवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में एक हिस्ट्रीशीटर भी मंच पर दिखा। इसका फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम, विधायक रवींद्र प्रताप सिंह और प्रदेश सरकार के मंत्री संदीप सिंह के साथ दिखे मुजाहिद हसन खान उर्फ गुड्डू के बारे में कहा जा रहा है कि उसके खिलाफ 28 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। अब इस पर सांसद सतीश गौतम ने कहा है कि उन्होंने तुरंत उसे माला से बाहर कर दिया था। उनका यह भी कहना है कि वह जांच करवा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। 

 

यह विवाद रविवार को शिखा झील पक्षी अभयारण्य में आयोजित राज्य सरकार के वृक्षारोपण कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। कार्यक्रम की तस्वीरों में उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, बीजेपी सांसद सतीश गौतम और विधायक रवींद्र प्रताप सिंह के साथ मुजाहिद हसन खान उर्फ गुड्डू मंच पर दिखाई दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गुड्डू के खिलाफ हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े 28 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह फिलहाल जमानत पर बाहर है।

 

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क्या बोले सांसद सतीश गौतम?

इस घटना के बारे में सवाल पूछे जाने पर अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने कहा है, 'जैसे ही उसने गर्दन करी माला में, मैंने उसे बाहर कर दिया। मैंने मंच से कहा कि कोई भी अपराधी किसी के भी साथ हो, वह अपराधी ही है। मुझे बाद में पता चला कि उस पर तीन दर्जन मुकदमे हैं। मैं इस बात की जांच करवा रहा हूं कि आखिर वह कैसे मंच पर चढ़ा। फिर उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यह विधानसभा मेरी लोकसभा से अलग है और मैं अतिथि के रूप में वहां गया। मंत्री जी को वहां जाना था इसलिए मैं उनके साथ वहां गया। मैंने तो उसे तुरंत माला से बाहर कर दिया। अपराधी को सही ठिकाने पर पहुंचाने का काम यहां की पुलिस करेगी।'

 

तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी के जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह ने पत्रकारों से कहा, 'यह एक सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसमें किसी के भी मंच पर आने की संभावना रहती है। मुझे उस व्यक्ति या उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी। मामले की जांच कराई जाएगी।' वहीं, खुद गुड्डू ने विवाद को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम में उसकी मौजूदगी को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उसने कहा, 'मैं राजनीति के साथ-साथ सामाजिक कार्यों से भी जुड़ा हूं। विभिन्न दलों के नेता जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में साथ आते हैं। यह कार्यक्रम मेरे क्षेत्र में आयोजित हुआ था, इसलिए इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान से जुड़े आयोजन में मेरी मौजूदगी स्वाभाविक थी।’

 

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इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विपक्षी दलों के समर्थकों और बीजेपी के आलोचकों ने सवाल उठाया कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को सरकारी कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच पर स्थान कैसे मिला।