मध्य प्रदेश का इंदौर शहर लगातार चर्चा में बना हुआ है। सबसे स्वच्छ का दर्जा पाने वाले इसी शहर में कई लोग दूषित पानी पीने से मर गए। अब एक और रोचक मामला सामने आया है। जिस इंदौर शहर में भीख मांगने पर बैन लगा हुआ है, उसी शहर में एक ऐसा भिखारी मिला है जिसके पास तीन घर, कार और करोड़ों की संपत्ति है। इतना ही नहीं, यह शख्स लोगों को ब्याज पर पैसे भी देता है। अब इंदौर प्रशासन ने कहा है कि इस शख्स को भिक्षावृत्ति से मुक्त करा लिया गया है। बताया गया है यह शख्स कुष्ठ रोग से पीड़ित है और छोटे से पहिए से घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है।
महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि आम लोगों की सूचना पर सर्राफा क्षेत्र से एक कुष्ठ रोगी को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने के लिए बचाया गया है। दिनेश मिश्रा, भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के नोडल अधिकारी भी हैं। उन्होंने बताया, ‘हमें पता चला है कि इस व्यक्ति के पास तीन पक्के मकान हैं। इनमें तीन मंजिलों वाला एक घर शामिल है। इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें उसने किराए पर दे रखा है।'उन्होंने बताया कि इस व्यक्ति के पास एक कार भी है जिसमें बैठकर वह भीख मांगने जाता है और इसके लिए उसने ड्राइवर रखा हुआ है।
ब्याज से हर दिन कमाता है हजारों रुपये
उन्होंने आगे बताया, ‘कुष्ठ रोग से जूझ रहा यह व्यक्ति पहियों के सहारे घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता है।’ उनके मुताबिक, यह आदमी साल 2021-22 से भीख मांग रहा है और यह भी पता चला है कि उसने सर्राफा क्षेत्र में लोगों को चार से पांच लाख रुपये उधार दिए हैं जिनसे वह दैनिक ब्याज वसूलता है। उन्होंने बताया, ‘इस ब्याज से वह हर दिन 1,000 से 2,000 रुपये कमाता है। इसके अलावा, उसे रोजाना 400 रुपये से 500 रुपये भीख के तौर पर मिल जाते हैं।’ दिनेश मिश्रा ने आगे बताया है कि इस आदमी को अब एक शेल्टर होम में रखा गया है।
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जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर भिखारी मुक्त शहर है और भीख मांगने की सूचना मिलने पर अभियान चलाकर भिखारियों का पुनर्वास किया जाता है। उन्होंने कहा कि सर्राफा क्षेत्र में भिक्षावृत्ति से बचाए गए व्यक्ति की संपत्तियों के बारे में प्रशासन को शुरुआती जानकारी मिली है और तथ्यों की जांच के बाद उचित कानूनी प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रुपाली जैन ने कहा कि कुष्ठ रोग से जूझ रहे इस व्यक्ति के मामले को मानवीय नजरिये से देखा जाना चाहिए क्योंकि उसने लाखों रुपये की कथित संपत्ति भीख मांगकर नहीं बनाई है।
क्यों मांगने लगा भीख?
उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति कुछ साल पहले मकान बनाने वाले मिस्त्री के तौर पर काम करता था लेकिन कुष्ठ रोग के कारण उंगलियों और पैरों को गंभीर नुकसान के बाद वह यह काम जारी नहीं रख सका और सामाजिक व पारिवारिक भेद-भाव का शिकार होने के बाद उसने सर्राफा क्षेत्र की मशहूर चाट-चौपाटी के पास रात के वक्त भीख मांगनी शुरू कर दी। रुपाली जैन ने बताया, ‘हमने पिछले चार साल के दौरान दो बार इस व्यक्ति को समझाया कि वह भीख मांगना छोड़ दे। उसने कुछ वक्त के लिए भीख मांगना छोड़ भी दिया था लेकिन बाद में उसने फिर से भिक्षावृत्ति शुरू कर दी।'
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बता दें कि इंदौर प्रशासन ने इंदौर में भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने तक पर कानूनी रोक लगा रखी है और उसका दावा है कि शहर भिक्षुक मुक्त है।
