बिहार के जमुई जिले में पुलिस ने जंगल के अंदर चल रही मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। सिकंदरा थाना क्षेत्र के मिर्जा पाठकचक में नहर पार जंगल के बीच टेंट लगाकर अवैध हथियार बनाए जा रहे थे। पुलिस ने छापेमारी कर मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। वहां से हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस फैक्ट्री में कई महीनों से हथियार बनाने का काम चल रहा था। एसपी विश्वजीत दयाल ने पूरे मामले का खुलासा किया। एसपी ने दावा किया कि चोरी के दूसरे मामले में जांच को दौरान इस गन फैक्ट्री का पता लगा।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यहां बनाए जाने वाले हथियारों की सप्लाई जमुई के अलावा मुंगेर, लखीसराय और दूसरे जिलों में भी की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मुंगेर से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। बता दें कि मुंगेर को अवैध हथियारों का गढ़ माना जाता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस फैक्ट्री का सीधा संबंध मुंगेर के किसी बड़े हथियार तस्कर से है।
चोरी के मामले की जांच में मिला सुराग
पुलिस के मुताबिक, 20 अक्टूबर को सिकंदरा थाना में कांड संख्या 283/2026 के तहत चोरी का मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में पुलिस ने छोटू पासवान को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने मिर्जा पाठकचक के नहर पार जंगल में अवैध हथियार बनाने की जानकारी दी।
इसके बाद जिला आसूचना इकाई (DIU) और सिकंदरा थाना की संयुक्त टीम ने जंगल में छापेमारी की। पुलिस जब जंगल के अंदर पहुंची तो झाड़ियों के बीच टेंट लगाकर हथियार बनाने का काम चल रहा था। वहां मौजूद लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया।
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कई महीनों से चल रही थी फैक्ट्री
गिरफ्तार आरोपियों में फैक्ट्री का कथित संचालक जमशेद अली उर्फ तौफीक मलिक, उसका सहयोगी डब्लू कुमार और चोरी के मामले का आरोपी छोटू पासवान उर्फ टीनू कुमार शामिल हैं। छोटू पासवान मिर्चा गांव का रहने वाला है। जमशेद अली आमीन गांव और डब्लू कुमार मिर्चा गांव का निवासी बताया गया है।
एसपी विश्वजीत दयाल के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि फैक्ट्री कई महीनों से चल रही थी। यहां देसी पिस्टल, कट्टा और दूसरे हथियार बनाए जाते थे। इन्हें जमुई के अलावा मुंगेर, लखीसराय और अन्य जिलों में सप्लाई किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अब इस नेटवर्क की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि फैक्ट्री से अब तक कितने हथियार बनाए गए और किन लोगों को बेचे गए। मुंगेर से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है।
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हथियार बनाने के कई उपकरण बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण जब्त किए। इनमें .315 बोर के दो जिंदा कारतूस, एक ड्रिल मशीन, एक हैंड बेस, एक मैगजीन फार्मा, 12 साइकिल फार्मा, पांच गोल रेती, एक मैगजीन स्प्रिंग, तीन चदरा, 12 हैक्सा ब्लेड, पांच वायरल स्प्रिंग और तीन ड्रिल बिट शामिल हैं। इसके अलावा लोहे के टुकड़े, बैरल बनाने का सामान और कई छोटे-बड़े औजार भी मिले हैं।
एसपी ने बताया कि आरोपियों ने आम लोगों की आवाजाही से दूर जंगल में फैक्ट्री बनाई थी। वहां पहुंचना आसान नहीं था। जंगल में झोपड़ी बनाकर हथियार बनाने का काम किया जा रहा था। पुलिस ने बरामद सामान जब्त कर लिया है। मामले में आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।
