बेंगलुरु में 19 दिन जेल में रहने वाले जापानी नागरिक हिरोतोशी तनाका को करीब सात साल बाद 75,000 रुपये का मुआवजा मिला है। कर्नाटक सरकार ने यह मुआवजा कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग (KSHRC) के आदेश के बाद दिया है। आयोग ने माना था कि हिरोतोशी तनाका को 2019 में जमानती अपराध के मामले में बिना उचित वजह 19 दिन तक जेल में रखा गया। इसी के बाद सरकार को उन्हें 75 हजार रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की गई थी।
हिरोतोशी तनाका अक्टूबर 2019 में अंग्रेजी सीखने के लिए बेंगलुरु आए थे। उन्होंने आरटी नगर में एक निजी अंग्रेजी संस्थान में दाखिला लिया था। उनका आरोप था कि संस्थान में अक्सर क्लास रद्द हो जाती थी और पढ़ाई भी नियमित नहीं होती थी। इसी को लेकर तनाका का संस्थान के प्रमुख के साथ विवाद हो गया। मारपीट भी हुई। इसके बाद आरटी नगर पुलिस ने उनके खिलाफ मारपीट और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया।
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जमानती अपराध में भी 19 दिन जेल में रहे
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन धाराओं में अपराध जमानती थे फिर भी पुलिस ने 23 नवंबर 2019 को हिरोतोशी तनाका को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया गया। वह जेल में 19 दिन तक रहे। बाद में 11 दिसंबर को उन्हें जेल से रिहा किया गया। तनाका का आरोप था कि जेल से बाहर आने के बाद सब-इंस्पेक्टर बी. हनुमंतरायप्पा ने उनसे 5,500 रिश्वत ली और बाद में मामला खत्म करने के लिए 3,000 और मांगे।जेल से निकलने के बाद उनके पास पैसे और रहने की जगह नहीं थी। वह कुछ समय पार्क में रहे और बाद में पुलिस स्टेशन परिसर में सोने लगे। इस बीच उनका वीजा भी खत्म हो गया। नवंबर 2020 में हाईकोर्ट ने अंग्रेजी संस्थान के प्रमुख से समझौते के बाद उनके खिलाफ FIR और आपराधिक मामला रद्द कर दिया।
पुलिस के खिलाफ शिकायत
तनाका ने दिसंबर 2020 में KSHRC में पुलिस पर उत्पीड़न और रिश्वत मांगने की शिकायत की। भारत छोड़ने के आदेश के बावजूद उन्होंने शिकायत की सुनवाई पूरी होने तक रुकने की कोशिश की लेकिन वह अपनी शिकायत की सुनवाई पूरी होने तक भारत में रहना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपनी गिरफ्तारी टालने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने अजीब तरीका अपनाया। उन्होंने आरटी नगर पुलिस स्टेशन में एसीपी कार्यालय के रिसेप्शन से एक सफेद प्लास्टिक की कुर्सी उठा ली। उनका मानना था कि कुर्सी चोरी करने पर पुलिस उनके खिलाफ मामला दर्ज करेगी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इससे वह भारत में रहकर अपनी शिकायत आगे बढ़ा सकेंगे। उन्होंने कुर्सी के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कीं। लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया।
बाद में उन्हें विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने बुलाया। पुलिस की ओर से उनके निर्वासन की सिफारिश के बाद उन्हें एक डिटेंशन सेंटर ले जाया गया। अप्रैल 2021 में उन्हें जापान भेज दिया गया। इसके बाद भी उन्होंने वकील की मदद से भारत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी।
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KSHRC ने पक्ष में दिया फैसला
9 मई 2022 को KSHRC ने माना कि जमानती अपराध के मामले में तनाका को 19 दिन जेल में रखना उचित नहीं था। आयोग ने ₹75,000 मुआवजा देने और संबंधित पुलिस अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की। आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सरकार ने इस साल आयोग की सिफारिशें लागू करने पर सहमति जताई। 22 जून को तनाका के वकील को ₹75,000 दे दिए गए। पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
तनाका ने कहा कि उनके पिता जापान में पुलिस अधिकारी हैं और वह पुलिस का सम्मान करते हैं लेकिन अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहते थे। इसी वजह से जापान लौटने के बाद भी उन्होंने करीब सात साल तक अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी।
