उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले से जुड़ा करोड़ों रुपये के सोने के गहनों के गायब होने का मामला अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब 17 साल पुराने इस प्रकरण में पुलिस ने अदालत को बताया कि मालखाने में रखे गए सोने के जेवर बारिश के पानी में खराब हो गए और बाकी बंदर उठा ले गए। अदालत ने इस दलील को सहजता से स्वीकार करने से इनकार कर दिया और प्रथम दृष्टया पूरे मामले में गंभीर अनियमितता, रिकॉर्ड में हेराफेरी और बहुमूल्य आभूषणों के गबन की आशंका जताई है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और मामले से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
मामले की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। कपूरथला निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दीपावली की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद हुए पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने मृतका के शरीर से नाक की सोने की कील, गले की सोने की चेन और लॉकेट, सोने की अंगूठी भारी सोने की 10 चूड़ियां उतारकर पुलिस को सौंप दी थीं। सभी गहनों को नियमानुसार सदर कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया गया था।
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17 साल तक चलता रहा मुकदमा
मामले में लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चलती रही। गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद 28 फरवरी 2024 को अदालत ने सबूतों के अभाव में मुदित अग्रवाल और उनके परिवार को बरी कर दिया। फैसला आने के बाद मुदित अग्रवाल ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर मालखाने में जमा अपने आभूषण वापस दिलाने की मांग की।
जब अदालत ने मालखाने में जमा आभूषणों के संबंध में जानकारी मांगी तो पुलिस की ओर से जो जवाब दिया गया, उसने सभी को हैरान कर दिया। पुलिस ने बताया कि 7 सितंबर 2013 को मालखाने की पोटलियों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था। उसी दौरान तेज बारिश हो गई, जिससे पोटलियां खराब हो गईं। पुलिस का दावा था कि बाद में वहां मौजूद बंदरों ने सोने के जेवरों को तहस-नहस कर दिया और कई आभूषण गायब हो गए।
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कोर्ट ने कहा- कहानी पर भरोसा करना मुश्किल
पुलिस की इस दलील पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बहुमूल्य आभूषणों को खुले आसमान के नीचे बिना सुरक्षा व्यवस्था के छोड़ देना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि इतने संवेदनशील और मूल्यवान माल की सुरक्षा में इस तरह की चूक सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं मानी जा सकती। ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सीलबंद पोटली में रखे गए बहुमूल्य आभूषणों को निकाल लिया गया और बाद में रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। अदालत ने यह भी माना कि मामले में सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ और तथ्यों को छिपाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस मालखानों में रखी जब्त संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर मृतका के शरीर से उतारे गए करोड़ों रुपये मूल्य के सोने के आभूषण कहां गए। क्या वे वास्तव में बारिश और बंदरों की भेंट चढ़ गए या फिर उनके गायब होने के पीछे कोई बड़ा खेल है? अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं।
